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एक वार्ड में 9 कूड़ाघर, 5 बेकार

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नगर निगम के ठेकों पर उठे सवाल

पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर।
कानपुर नगर निगम में निर्माण कार्यों और ठेकों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। वार्ड-23 कल्याणपुर आवास विकास में एक ही फर्म ने नियमों को दरकिनार करते हुए एक-दो नहीं, बल्कि नौ अत्याधुनिक सॉलिड वेस्ट ट्रांसफर स्टेशन बना दिए। करीब 90 लाख रुपये की लागत से तैयार इन नौ कूड़ाघरों में केवल चार संचालित हो रहे हैं, जबकि पांच पूरी तरह अनुपयोगी पड़े हैं। वहीं, शहर के कई वार्ड ऐसे हैं, जहां आज भी एक भी अत्याधुनिक कूड़ाघर नहीं है।कल्याणपुर आवास विकास वार्ड-23 करीब ढाई किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और यहां की आबादी लगभग 40 हजार है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत मेसर्स श्रीराम इन्फ्राटेक ने करीब 10-10 लाख रुपये की लागत से इन स्टेशनों का निर्माण कराया। आवास विकास-3, पनकी नहर की पटरी और अंबेडकरपुरम सहित कई स्थानों पर स्टेशन बनाए गए हैं। कुछ जगहों पर एक ही स्थान पर दो-दो स्टेशन बना दिए गए।क्षेत्रीय पार्षद रामनारायण का कहना है कि निर्माण से पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई। करीब दो वर्ष पहले कंपनी के कर्मचारी आए और एक के बाद एक नौ कूड़ाघरों का निर्माण कर दिया। पार्षद ने नगर आयुक्त से शिकायत भी की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका सवाल है कि जब कई वार्डों में कूड़ा निस्तारण की मूलभूत व्यवस्था नहीं है, तो एक ही वार्ड में इतनी बड़ी संख्या में स्टेशन क्यों बनाए गए।नियमानुसार एक वार्ड में अधिकतम चार अत्याधुनिक कूड़ाघर बनाए जा सकते हैं। इसके बावजूद नौ स्टेशन बनाए जाने से नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी, अधिकारियों और फर्मों की मिलीभगत तथा कमीशनबाजी के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।वार्ड-25 नवीननगर-काकादेव के पार्षद नीरज सिंह ने भी इसी फर्म के कार्यों पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार एम ब्लॉक काकादेव की गहमरी गली में करीब एक करोड़ दस लाख रुपये की लागत से 400 मीटर सड़क का ठेका मार्च-अप्रैल में दिया गया था, लेकिन काम अब तक अधूरा है। नालियों और इंटरलॉकिंग में घटिया सामग्री के इस्तेमाल तथा मानकों की अनदेखी के आरोप हैं।इसके अलावा ग्वालटोली स्थित सीसामऊ नाले की दीवार का एक हिस्सा भी निर्माण पूरा होने से पहले जून में ढह गया था। जांच में लापरवाही और घटिया कार्य सामने आने के बाद फर्म को ब्लैकलिस्ट किया गया था। इसके बावजूद उसी फर्म के अन्य कार्यों को लेकर सवाल उठना नगर निगम की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

नगर आयुक्त से शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
क्षेत्रीय पार्षद रामनारायण का कहना है कि निर्माण से पहले उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई। बल्कि करीब दो साल पहले कंपनी के कर्मचारी आए और एक के बाद एक 9 कूड़ाघरों का निर्माण करते गए।उन्होंने इसकी शिकायत नगर आयुक्त से भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि जब कई वार्डों में कूड़ा निस्तारण की बुनियादी व्यवस्था तक नहीं है तो एक ही वार्ड में इतनी बड़ी संख्या में स्टेशन क्यों बना दिए गए।