
स्वास्थ्य जागरूकता पर हुई सार्थक परिचर्चा
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस (डॉक्टर्स डे) के अवसर पर पारदर्शी विकास न्यूज़ एवं दीर्घायु आयुर्वेदिक स्टोर के संयुक्त तत्वावधान में पारदर्शी विकास न्यूज़ कार्यालय में सम्मान समारोह एवं स्वास्थ्य परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों से जुड़े चिकित्सकों का सम्मान कर उनके समाज और मानव सेवा में दिए जा रहे योगदान को सराहा गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता, पूर्व अध्यक्ष, भारतीय केंद्रीय चिकित्सा परिषद, भारत सरकार रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इसके बाद जगनायक प्रधान,,मानवी भटनागर ने सभी आमंत्रित चिकित्सकों को सम्मान पत्र एवं स्मृति चिह्न (कप) भेंट कर सम्मानित किया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता का पगड़ी, पटका, माल्यार्पण, सम्मान पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर विशेष सम्मान किया गया। वहीं मुख्य अतिथि ने पारदर्शी विकास न्यूज़ के संरक्षक अरविंद दुबे को पटका एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया और सामाजिक सरोकारों तथा जनहित की पत्रकारिता के लिए उनके प्रयासों की सराहना की।कार्यक्रम में डॉ. मनोज मंजानी (नेचुरोपैथी विशेषज्ञ), वैद्य राज कुमार शुक्ला (आयुर्वेदाचार्य), डॉ. राज पांडेय (सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट), डॉ. श्रद्धा राठौर (होम्योपैथी विशेषज्ञ), डॉ. प्रांशु उमराव (फिजियोथेरेपिस्ट) तथा वैद्य हिमांशु मिश्रा (आयुर्वेदाचार्य) को भी सम्मान पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।सम्मान समारोह के बाद स्वास्थ्य जागरूकता विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि चिकित्सक केवल रोगों का उपचार ही नहीं करते, बल्कि समाज को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा और फिजियोथेरेपी जैसी पद्धतियों का समन्वय बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।कार्यक्रम में उपस्थित सभी चिकित्सकों ने भी अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, योग, व्यायाम, नशामुक्त जीवन और समय पर उपचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोगों से स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बीमारियों से बचाव ही सबसे प्रभावी उपचार है और प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए।कार्यक्रम के समापन पर कर्नाटक एंटीबायोटिक्स के प्रतिनिधि अभिषेक कश्यप द्वारा उपस्थित लोगों को आयुर्वेदिक औषधियों का वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन मार्केटिंग मैनेजर पीयूष मिश्रा ने किया। अंत में पारदर्शी विकास न्यूज़ के संपादक सुशील कुमार ने सभी अतिथियों, चिकित्सकों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में भी जनस्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता से जुड़े ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।

डॉक्टर्स डे केवल चिकित्सकों का सम्मान करने का अवसर नहीं, बल्कि समाज को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने का भी दिन है। प्राकृतिक चिकित्सा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर आधारित है। यदि लोग संतुलित आहार, नियमित योग, पर्याप्त नींद और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाएं तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। स्वस्थ समाज के निर्माण में जनजागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है।-डॉ. मनोज मंजानी (नेचुरोपैथी विशेषज्ञ)
आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का विज्ञान है। बदलती जीवनशैली के कारण कई बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में आयुर्वेद के सिद्धांतों का पालन, उचित खान-पान और दैनिक दिनचर्या अपनाना बेहद आवश्यक है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना चाहिए और समय-समय पर चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लेना चाहिए।-वैद्य राज कुमार शुक्ला (आयुर्वेदाचार्य)

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में गलत बैठने की आदत, लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग तथा शारीरिक निष्क्रियता कई समस्याओं को जन्म दे रही है। नियमित व्यायाम, सही पोश्चर और समय पर फिजियोथेरेपी से इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। स्वस्थ शरीर ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी है और उसकी नियमित देखभाल जरूरी है।-डॉ. राज पांडेय (सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट)
होम्योपैथी रोग के मूल कारण को ध्यान में रखकर उपचार करती है। उपचार के साथ रोगी की जीवनशैली, मानसिक स्थिति और खान-पान पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। यदि लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें और बीमारी की शुरुआत में ही चिकित्सकीय सलाह लें तो गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है। स्वस्थ समाज के निर्माण में सभी चिकित्सा पद्धतियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।-डॉ. श्रद्धा राठौर (होम्योपैथी विशेषज्ञ)

फिजियोथेरेपी केवल दर्द कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर की कार्यक्षमता बढ़ाने और भविष्य की समस्याओं से बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नियमित स्ट्रेचिंग, व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर कमर, गर्दन और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है। लोगों को दर्द होने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।-डॉ. प्रांशु उमराव (फिजियोथेरेपिस्ट)
आयुर्वेद का मूल उद्देश्य रोग होने से पहले उसकी रोकथाम करना है। संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, योग, प्राणायाम और औषधीय पौधों का उचित उपयोग शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। आधुनिक जीवनशैली में आयुर्वेद की उपयोगिता और भी बढ़ गई है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहकर प्राकृतिक और संतुलित जीवनशैली अपनानी चाहिए।-वैद्य हिमांशु मिश्रा (आयुर्वेदाचार्य)
डॉक्टर्स डे समाज के प्रति चिकित्सकों की सेवा, समर्पण और जिम्मेदारी का सम्मान करने का अवसर है। स्वस्थ समाज के निर्माण में सभी चिकित्सा पद्धतियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित जीवनशैली और समय पर उपचार अपनाकर स्वयं तथा परिवार के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए।-डॉ. सुरेश चंद्र गुप्ता (पूर्व अध्यक्ष, भारतीय केंद्रीय चिकित्सा परिषद, भारत सरकार)