
पारदर्शी विकास ब्यूरो कुशीनगर जिले में डीजल संकट और प्रशासनिक सख्ती के बीच रामकोला थाने के एक कांस्टेबल पर नियमों को ताक पर रखकर पेट्रोल पंप से भारी मात्रा में डीजल भरवाने का आरोप लगा है। मामला कप्तानगंज तहसील क्षेत्र स्थित एक नायरा पेट्रोल पंप का बताया जा रहा है, जहां कथित तौर पर पुलिसकर्मी ने आम लोगों की लाइन तोड़कर करीब 50 लीटर डीजल गैलन में भरवाया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रामकोला थाने में तैनात कांस्टेबल सोहन लाल एक प्रधान की गाड़ी से पेट्रोल पंप पहुंचे और कर्मचारियों से कहा कि “थाने पर इमरजेंसी है।” इसी हवाले से उन्होंने तत्काल डीजल देने का दबाव बनाया। आरोप है कि इस दौरान वहां मौजूद किसानों और अन्य उपभोक्ताओं की लंबी कतार को नजरअंदाज कर सीधे डीजल भरवा लिया गया।मौके पर मौजूद लोगों ने जब पुलिसकर्मी के वर्दी में न होने और इतनी बड़ी मात्रा में डीजल दिए जाने पर सवाल उठाए, तो उन्होंने बार-बार पुलिस का रौब दिखाया। घटना के बाद पेट्रोल पंप पर मौजूद लोगों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना था कि जब आम जनता को सीमित मात्रा में डीजल दिया जा रहा है, तब प्रभावशाली लोगों के लिए नियम अलग क्यों हैं?सबसे अहम बात यह है कि इसी दिन कप्तानगंज तहसील प्रशासन ने डीजल वितरण को लेकर सख्त निर्देश जारी किए थे। उप जिलाधिकारी कप्तानगंज मु. जफर ने सभी पेट्रोल पंप संचालकों को आदेश दिया था कि किसानों की जरूरत को देखते हुए गैलन में अधिकतम 5 लीटर डीजल ही दिया जाए। साथ ही सीमा से सटे इलाकों में कालाबाजारी की आशंका को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने और सभी सीसीटीवी कैमरों को चालू रखने के निर्देश भी दिए गए थे।हालांकि, रामकोला थाना प्रभारी ने किसी भी सरकारी या थाने की जरूरत के लिए डीजल मंगाने से साफ इनकार किया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किस आधार पर नियमों को दरकिनार कर इतनी बड़ी मात्रा में डीजल दिया गया?पूरा मामला सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक ने जांच के निर्देश दे दिए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगी या वास्तव में नियम तोड़ने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा।