
भारत सरकार द्वारा क्रिमिनल ट्राइब एक्ट को समाप्त कर पीड़ित जातियों को डिनोटिफाइड ट्राइब्स (DNT), नोमेडिक ट्राइब्स और सेमी नोमेडिक ट्राइब्स का दर्जा दिए जाने के बावजूद आज भी इन समुदायों को उनका पूरा संवैधानिक अधिकार नहीं मिल पाया है। डीएनटी समुदाय के लोगों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर “जनजाति” शब्द को समाप्त कर केवल “विमुक्त जाति” तक सीमित कर दिया गया, जिससे समुदाय की पहचान और अधिकार दोनों प्रभावित हुए।डीएनटी समुदाय के प्रतिनिधियों का आरोप है कि जिन लोगों के पूर्वजों ने देश और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने राज-पाट तक का बलिदान दिया, आजादी के 78 वर्षों बाद भी उनके वंशज दर-दर भटकने और उपेक्षा झेलने को मजबूर हैं। समुदाय का कहना है कि देश में उनकी आबादी 35 करोड़ से अधिक होने के बावजूद उन्हें संविधान के किसी स्पष्ट अनुच्छेद में स्थान नहीं मिल सका।समुदाय के संगठनों का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार ने समय-समय पर आयोग, समिति और कमेटियां बनाकर रिपोर्ट तो तैयार कराई, लेकिन उनकी सिफारिशों को लागू नहीं किया गया। इससे डीएनटी समाज में निराशा और असंतोष बढ़ रहा है।डीएनटी डेवलपमेंट फाउंडेशन उत्तर प्रदेश के प्रमुख महामंत्री डॉ रामानंद राजभर ने कहा कि डीएनटी समुदाय लगातार अपने अधिकारों और सम्मानजनक पहचान की मांग उठा रहा है, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। उन्होंने सरकार से समुदाय को संवैधानिक संरक्षण और अधिकार देने की मांग की है।