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डीएनटी समाज ने संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण की उठाई मांग

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पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। डीएनटी डेवलपमेंट फाउंडेशन उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में शनिवार को दारुलसफा स्थित कमान हॉल, विधायक निवास में विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध घुमंतू जनजाति (डीएनटी) समाज के संवैधानिक अधिकारों, आरक्षण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अलग आयोग के गठन की मांग को लेकर चिंतन शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज से जुड़े पदाधिकारियों और विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा सरकार से लंबित मांगों को शीघ्र पूरा करने की अपील की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध घुमंतू जनजाति समुदाय विकास एवं कल्याण बोर्ड के सदस्य एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष भारत भाई बाबू भाई पटनी रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रमेश गौड़ कश्यप और भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय से जुड़े लाल बहादुर राजभर उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डीएनटी डेवलपमेंट फाउंडेशन उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष कैलाश नाथ निषाद ने की, जबकि संचालन डॉ. डी.आर. वर्मा और रामानंद राजभर ने किया।कार्यक्रम में बताया गया कि उत्तर प्रदेश में लगभग 84 विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध घुमंतू जनजातियां निवास करती हैं, लेकिन वर्तमान शासनादेशों में सीमित जातियों को ही शामिल किया गया है। इससे बड़ी संख्या में समुदाय के लोग जाति प्रमाण पत्र, आरक्षण, सरकारी योजनाओं और अन्य संवैधानिक सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद विभिन्न आयोगों ने डीएनटी समाज के उत्थान के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें कीं, लेकिन उनका पूर्ण क्रियान्वयन आज तक नहीं हो सका।चिंतन शिविर के दौरान मुख्यमंत्री को भेजे जाने वाले ज्ञापन पर भी चर्चा हुई। ज्ञापन में डीएनटी समाज के लिए स्थायी आयोग एवं मंत्रालय के गठन, महाराष्ट्र की तर्ज पर आरक्षण लागू करने, सभी जिलों में विमुक्त जाति प्रमाण पत्र जारी करने, प्रत्येक जिले में शिकायत प्रकोष्ठ स्थापित करने, इदाते आयोग की सिफारिशों के अनुरूप अलग उपश्रेणी बनाने, राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने तथा सरकारी सेवाओं एवं योजनाओं में प्रभावी भागीदारी देने सहित 11 प्रमुख मांगें शामिल की गई हैं। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया गया। इस दौरान डॉ. रामानंद राजभर, डॉ. डी.आर. वर्मा, हरबंस सिंह, अभिनव कश्यप, राजू कश्यप, श्यामवीर कठेरिया सहित अनेक पदाधिकारी एवं समाज के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

"विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध घुमंतू समाज वर्षों से अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। आज भी हमारे समाज के हजारों परिवार शिक्षा, रोजगार, आवास, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं से वंचित हैं। हमारी मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों की है। सरकार आयोगों की सिफारिशों को लागू करे, समाज को सम्मानजनक प्रतिनिधित्व दे और ऐसी नीतियां बनाए, जिनसे आने वाली पीढ़ियों को समान अवसर मिल सकें।"-भारत भाई बाबू भाई पटनी

"डीएनटी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस निर्णय लेने का समय आ गया है। उत्तर प्रदेश के लाखों लोग आज भी अपनी पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार अलग आयोग का गठन करे, प्रभावी आरक्षण व्यवस्था लागू करे, सभी पात्र समुदायों को प्रमाण पत्र और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाए। हमारा उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय, सम्मान और विकास पहुंचाना है।"-प्रदेश अध्यक्ष कैलाश नाथ निषाद