
अस्थि कलश बचाओ मोर्चे का शांतिपूर्ण आंदोलन
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। अम्बेडकर महासभा के प्रांगण से बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के अस्थि कलश को हटाने के बयान का तीखा विरोध हो रहा है। आम्बेडकरवादी सामाजिक संगठनों ने शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन शुरू कर दिया है। आंदोलन का नेतृत्व बहुजन समाज पार्टी की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे कमला कांत गौतम कर रहे हैं।मोर्चा संयोजक पूर्व कैबिनेट मंत्री के.के. गौतम ने कहा कि यह ऐतिहासिक स्थल है। 14 अप्रैल 1991 को डॉ. सविता अंबेडकर ने अस्थि कलश, 21 अप्रैल 1993 को उपराष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने बोधि वृक्ष और 14 सितंबर 2017 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने धम्म चक्र स्थापित किया था। यहां 14 अप्रैल व 6 दिसंबर को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री श्रद्धांजलि देते हैं। संविधान के अनुच्छेद 49 के तहत इसका संरक्षण राज्य का दायित्व है। मांग है कि इसी स्थल पर भव्य स्मारक बनाकर सौंदर्यीकरण हो। पूर्व एसडीएम रामकुमार गौतम ने कहा कि इसी स्थल से 1990 में बी.पी. सिंह ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण व हरिजन शब्द हटाने की घोषणा की थी। 1993 में मुलायम सिंह ने एससी-एसटी आरक्षण बढ़ाया था। छेड़छाड़ हुई तो पूरा बहुजन समाज आंदोलन को बाध्य होगा। डॉ. राजारामन आनंद ने सवाल किया कि जब सीएम प्रदेश की बाबा साहब की प्रतिमाओं पर छतरी लगवा सकते हैं तो अस्थि कलश संरक्षित क्यों नहीं? बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष दयासागर बौद्ध बोले- यह करोड़ों अनुयायियों की आस्था का मंदिर है, इसे कोई छेड़ नहीं सकता। मोर्चे ने सीएम से मिलने 5 जून व 11 जून को समय मांगा, पर जवाब नहीं मिला। चेताया कि मांग न मानी गई तो चुनाव में परिणाम भुगतना पड़ेगा।