
PARDARSHI VIKASH NEWS अमेरिका और ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए एक शांति समझौते (MoU) पर सहमति जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद समझौता हो गया है। ईरान ने भी बयान जारी कर कहा कि महीनों की कठिन वार्ता के बाद सीजफायर समझौते को अंतिम रूप दिया गया है।इस समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और समुद्री नाकेबंदी हटाने पर सहमति बनी है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंध तुरंत हटाए जाएंगे और तेल व्यापार को सामान्य करने के लिए मार्ग खोला जाएगा।ईरान के उप विदेश मंत्री के अनुसार, अमेरिका को पहले अपने कुछ वादों को पूरा करना होगा, जिनमें नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, सैन्य कार्रवाई रोकना और ईरान के फ्रीज्ड फंड जारी करना शामिल है। वहीं अमेरिका का कहना है कि किसी भी फंड रिलीज से पहले ईरान को अपनी प्रतिबद्धताओं को लागू करना होगा।इस समझौते के मसौदे में 14 प्रमुख बिंदु बताए जा रहे हैं, जिनमें युद्धविराम, प्रतिबंधों में राहत, होर्मुज स्ट्रेट खोलना और 60 दिन की नई वार्ता प्रक्रिया शामिल है। हालांकि अमेरिका ने अभी तक आधिकारिक तौर पर मसौदे की पुष्टि नहीं की है।पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में इस पीस डील पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह 47 वर्षों में पहली हाई-लेवल अमेरिका-ईरान बैठक होगी।इजराइल ने अब तक इस समझौते पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जबकि रिपोर्ट्स के मुताबिक वह इस डील से असहज है क्योंकि इसमें उसके कई युद्धकालीन उद्देश्य पूरे नहीं हो रहे।अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों की अर्थव्यवस्था दबाव में थी—अमेरिका में महंगाई और तेल कीमतों की चिंता, जबकि ईरान पर प्रतिबंध और फ्रीज्ड फंड का संकट था।शांति समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में तेजी देखी गई, खासकर एशियाई शेयर बाजारों में उछाल और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।यह समझौता लागू होता है तो मिडिल ईस्ट में दशकों से चले आ रहे तनाव में एक बड़ा मोड़ माना जाएगा, हालांकि कई मुद्दों पर अभी भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।