
PARDARSHI VIKASH NEWS कानपुर देहात में नदियों के बढ़ते जल प्रदूषण को रोकने और “निर्मल-अविरल गंगा” अभियान को मजबूत करने के लिए बनाए गए अंत्येष्टि स्थल जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते बदहाल स्थिति में पहुंच गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए ये स्थल अब कई जगहों पर उपेक्षा का शिकार हैं।सरकार ने वर्ष 2016 के बाद जिले की करीब 48 ग्राम पंचायतों में नदियों में शव बहाने की परंपरा को रोकने और अंतिम संस्कार के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अंत्येष्टि स्थलों का निर्माण कराया था। प्रत्येक स्थल पर लगभग 25-25 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन निर्माण के बाद इनके रखरखाव और संचालन पर ध्यान नहीं दिया गया।कई स्थानों पर ये स्थल अब खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। अधिकांश जगहों पर घास-फूस और झाड़ियां उग आई हैं, शौचालय गंदगी से भरे पड़े हैं और पेयजल व्यवस्था भी पूरी तरह खराब हो चुकी है। रसूलाबाद, मैथा और डेरापुर ब्लॉकों के कई गांवों में बने अंत्येष्टि स्थलों की स्थिति बेहद दयनीय है।मैथा के स्थल पर लगा हैंडपंप खराब पड़ा है, जबकि रसूलाबाद के नारखुर्द में स्थल पूरी तरह झाड़ियों से घिर चुका है। डेरापुर के कुढ़ावल में बना अंत्येष्टि स्थल निर्माण के बाद कभी उपयोग में नहीं आ सका और तेज हवाओं में इसके शेड भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन स्थलों का नियमित रखरखाव और संचालन सुनिश्चित किया जाए तो यह उद्देश्य सफल हो सकता है, लेकिन फिलहाल स्थिति पूरी तरह उपेक्षित बनी हुई है।