
Pardarshi Vikas News Amethi
मुख्य विकास अधिकारी पूजा साहू ने बेनीपुर में संचालित 50 शैय्या युक्त एकीकृत आयुष चिकित्सालय एवं फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान नोडल अधिकारी सहित अन्य चिकित्सक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। मुख्य विकास अधिकारी ने सर्वप्रथम रक्त परीक्षण कक्ष का निरीक्षण किया और लैब टेक्नीशियन से जांच विवरण की जानकारी प्राप्त की। इसके पश्चात उन्होंने पंचकर्म कक्ष का अवलोकन किया, जहां उपस्थित चिकित्सकों ने पंचकर्म की विभिन्न क्रियाओं और उनसे होने वाले लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने चिकित्सालय परिसर और शौचालयों की साफ-सफाई व्यवस्था संतोषजनक न पाए जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने नोडल चिकित्सक डॉ. मोहम्मद काशिफ को तत्काल व्यवस्था सुधारने और इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए कि किन कारणों से ऐसी अव्यवस्था उत्पन्न हुई। सीडीओ ने निर्देश दिए कि ओपीडी रजिस्टर पर आने वाले प्रत्येक मरीज का मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से अंकित किया जाए। अस्पताल में उपस्थित मरीजों से संवाद कर सीडीओ ने उनसे प्राप्त हो रहे उपचार और दवाओं की उपलब्धता के बारे में पूछा, जिस पर मरीजों ने संतोषजनक प्रतिक्रिया दी। नोडल अधिकारी को निर्देशित किया गया कि किसी भी मरीज या आगंतुक को कठिनाई न हो और उपचार में कोई लापरवाही न बरती जाए। स्टॉक पंजिका से दवाओं का समय-समय पर मिलान करने और यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि कक्ष में कोई भी एक्सपायरी दवा न रखी हो। तत्पश्चात सीडीओ ने बेनीपुर में ही संचालित फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) का निरीक्षण किया। इस अवसर पर जिला पंचायत राज अधिकारी मनोज त्यागी और खंड विकास अधिकारी बृजेश सिंह उपस्थित रहे। प्लांट ऑपरेटर ने पांच चरणों में सेप्टिक टैंक के मलबे से खाद बनाने की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। सीडीओ ने खाद निर्माण और उसकी मार्केटिंग रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि एफएसटीपी (FSTP) से न केवल पर्यावरण संरक्षण होता है, बल्कि अपशिष्ट का सुरक्षित निस्तारण भी सुनिश्चित होता है। सीडीओ ने डीपीआरओ को निर्देशित किया कि सेप्टिक टैंक वेंडर्स और मालिकों के साथ बैठक कर एक कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि प्लांट का अधिकतम उपयोग हो सके। उन्होंने इस प्रक्रिया में स्वयं सहायता समूहों को सम्मिलित करने की बात कही ताकि उनके आजीविका स्रोत में वृद्धि हो सके और प्लांट अधिक क्रियाशील बने।