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रिश्वत मामले में सस्पेंड डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर को CBI का जवाब

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PARDARSHI VIKASH NEWS रिश्वतखोरी के आरोपों में घिरे पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर द्वारा अभियोजन स्वीकृति को चुनौती देने वाली याचिका का CBI ने विशेष अदालत में कड़ा विरोध किया है। एजेंसी ने अदालत में दाखिल अपने जवाब में कहा कि मुकदमा चलाने की मंजूरी पूरी तरह वैध है और आरोपी की याचिका तथ्य एवं कानून दोनों के आधार पर टिकाऊ नहीं है। मामले में अब 4 जून को बहस होगी।CBI के अनुसार भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 19(2) के तहत सक्षम प्राधिकारी ने सभी दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद विधिवत अभियोजन स्वीकृति प्रदान की थी। एजेंसी ने बताया कि शिकायतकर्ता की लिखित शिकायत के आधार पर 16 अक्टूबर 2025 को हरचरण सिंह भुल्लर और सह-आरोपी कृष्णु शारदा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जांच पूरी होने के बाद 3 दिसंबर 2025 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई।CBI ने अदालत को बताया कि 13 मार्च को अदालत इस मामले में संज्ञान ले चुकी है और उस समय वैध अभियोजन स्वीकृति आदेश रिकॉर्ड पर मौजूद था। ऐसे में अब उसकी वैधता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। एजेंसी ने भुल्लर के इस तर्क को भी खारिज किया कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी केवल पंजाब सरकार ही दे सकती थी। CBI का कहना है कि भुल्लर एक IPS अधिकारी हैं और उन्हें सेवा से हटाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है, इसलिए केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा दी गई मंजूरी वैध है। साथ ही पंजाब सरकार को भी प्रक्रिया की जानकारी दी गई थी और 3 दिसंबर 2025 को मुख्य सचिव को सैंक्शन प्रस्ताव की सूचना भेजी गई थी।CBI ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि अभियोजन स्वीकृति से जुड़े विवाद ट्रायल के दौरान उठाए जा सकते हैं। एजेंसी का यह भी कहना है कि रिश्वत मांगना या लेना किसी सरकारी अधिकारी के आधिकारिक कर्तव्यों का हिस्सा नहीं हो सकता, इसलिए अतिरिक्त कानूनी सुरक्षा का द