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पुण्यतिथि पर याद की गई धम्मसेवक की सामाजिक सेवाएं

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पारदर्शी विकास न्यूज़ अमेठी। सामाजिक चिंतक और लेखक निर्वाण प्राप्त चुन्नी लाल धम्म सेवक की दसवीं पुण्यतिथि पर सामाजिक कार्यकर्ताओ ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।शिक्षक और समाजकर्मी के रूप में जीवन भर बाबा साहब डॉ अम्बेडकर की  बौद्ध धम्म की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार को समर्पित रहे धम्मसेवक 6मई2016को दुनिया में नहीं रहे।निर्वाण प्राप्त चुन्नी लाल धम्मसेवक ने शिक्षक के रूप में प्राथमिक विद्यालय रजापुर,भादर में लम्बे समय तक सेवाएं दीं। यहां के बाद उन्होंने प्राथमिक विद्यालय टीकरमाफी -1, में लम्बे समय तक पदोन्नति के बाद कुछ महीने तक वे प्राथमिक विद्यालय मंगौली, जगदीशपुर में प्र अ रहे। वापस आने पर कन्या प्राथमिक विद्यालय टीकरमाफी के प्र अ रहे और इस विद्यालय के विकास में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान सुल्तानपुर में  आयोजित टी एल एम में उनकी ओर से बनाए गए टी एल एम -बाईस्कोप की चर्चा आज भी शिक्षकों के बीच होती है।इस विद्यालय से पदोन्नति होने पर वे उच्च प्राथमिक विद्यालय सांगापुर में प्र अ पद पर तैनात हुए और यहीं से 2009मे  सेवानिवृत्त हुए।मान्यवर कांशीराम की ओर से बामसेफ बनाने के बाद वे अमेठी में बामसेफ की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सक्रिय रहे। इसके पहले 1974में 14अप्रैल को भारतीय अनुसूचित जाति संघ के बैनर तले पहली बार बाबा साहब डॉ अम्बेडकर की जयंती समारोह का आयोजन कराया।इस कार्यक्रम में उस समय बमुश्किल सौ लोग ही जुलूस में शामिल हुए थे।अम्बेडकर सेवा समिति के अध्यक्ष संजय कुमार शास्त्री ने पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि धम्मसेवक का पूरा परिवार बाबा साहब डॉ अम्बेडकर के मानवतावादी मूवमेंट को आगे बढ़ाने में हमेशा अग्रणी भूमिका में रहा है।धम्मसेवक की ओर से लिखित साहित्य के प्रकाशन में उल्लेखनीय सहयोगी रहे डॉ सुनील दत्त ने बताया कि उनकी पुस्तक बौद्ध गीत माला और सुखी परिवार -सुखी संसार आज भी बौद्धों के बीच लोकप्रिय है।बामसेफ के जिला संयोजक संजीव भारती ने कहा कि पिता जी  ने शिक्षा प्रसार के साथ समाज और धम्मसेवा का संदेश दिया था, उनके संदेश को आगे बढ़ाने की दिशा में हमारा पूरा जीवन समर्पित है।