
Pardarshi Vikas News Jhansi
झांसी। रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी के निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. सुशील कुमार सिंह ने बुन्देलखण्ड के किसानों को खरबूजे की खेती अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि खरबूजा एक महत्वपूर्ण एवं लाभकारी फल फसल है, इसकी खेती कर किसान कम समय में अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं।
डॉ. सिंह ने जानकारी दी कि खरबूजे की बुवाई मार्च से 15 अप्रैल तक आसानी से की जा सकती है। रबी फसलों की कटाई के बाद किसान इसकी खेती कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि खरबूजे की अच्छी वृद्धि के लिए 25 से 36 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त रहता है। अधिक तापमान एवं कम आर्द्रता की स्थिति में फल की मिठास बढ़िया रहती है, इसलिए सिंचाई का प्रबंधन मिट्टी की संरचना के अनुसार करना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि खरबूजे की खेती के लिए बलुई दोमट भूमि सर्वोत्तम मानी जाती है, हालांकि चिकनी दोमट एवं सामान्य दोमट मिट्टी में भी इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है। खेत की तैयारी के लिए किसानों को शीघ्र पलावा कर प्रति एकड़ 40-50 कुंतल सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने की सलाह दी गई है।
बीज दर के संबंध में उन्होंने बताया कि प्रति एकड़ 600 से 800 ग्राम बीज पर्याप्त होता है। कतार से कतार की दूरी 1.5 मीटर तथा पौध से पौध की दूरी 50 से 60 सेंटीमीटर रखने से अच्छे आकार के फल प्राप्त होते हैं। प्रमुख उन्नत किस्मों में पूसा शरबती, अर्कराजहंस, हरामधु, अर्काजीत एवं पूसा मथुरस शामिल हैं।
फसल सुरक्षा पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि फूल अवस्था में रस चूसक कीटों के नियंत्रण हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 250-300 मिली मात्रा को 200-300 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
डॉ. सिंह ने बताया कि जून के प्रथम सप्ताह से खरबूजे के फल मिलने शुरू हो जाते हैं। एक एकड़ क्षेत्र से किसान 80 से 120 कुंतल तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, इससे प्रति एकड़ लगभग 1 से 1.25 लाख रुपये तक शुद्ध लाभ मात्र 2 से 2.5 महीने में संभव है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे 15 अप्रैल तक बुवाई सुनिश्चित कर लें, ताकि पौधों की बढ़वार अच्छी हो और अधिक संख्या में फल प्राप्त हो सकें।