
PARDARSHI VIKASH NEWS नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शनिवार को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत 23 लोगों को आतंकी घोषित किया है। सरकार के अनुसार ये सभी प्रतिबंधित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) और जमात-उद-दावा (JuD) से जुड़े हैं। इन पर आतंकियों की भर्ती, भारत में घुसपैठ कराने, आतंकी हमलों की साजिश रचने, आतंकवाद के लिए धन जुटाने, हथियारों की आपूर्ति और अन्य प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने के आरोप हैं। घोषित 23 आतंकियों में 11 जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी हैं, जबकि 12 पाकिस्तान से जुड़े हैं। इनमें सात पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और चार पाकिस्तान में रह रहे बताए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद केंद्र सरकार द्वारा UAPA के तहत घोषित आतंकियों की कुल संख्या बढ़कर 80 हो गई है। सरकार के अनुसार सूची में शामिल कुछ जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों का संबंध वर्ष 2016 के नगरोटा आर्मी कैंप हमले और 2022 के सुनजवां आतंकी हमले से भी रहा है। 29 नवंबर 2016 को नगरोटा स्थित सेना के कैंप पर हुए हमले में सात जवान शहीद हुए थे, जबकि 22 अप्रैल 2022 को जम्मू के सुनजवां क्षेत्र में CISF जवानों की बस पर हुए हमले में एक जवान शहीद और कई अन्य घायल हुए थे। 2019 में UAPA में संशोधन के बाद केंद्र सरकार को किसी संगठन के साथ-साथ किसी व्यक्ति को भी आतंकी घोषित करने का अधिकार मिला। गृह मंत्रालय अधिसूचना जारी कर ऐसे व्यक्तियों का नाम UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल करता है। आतंकी घोषित किए जाने के बाद संबंधित व्यक्ति की संपत्ति जब्त या फ्रीज की जा सकती है, वित्तीय लेनदेन और गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाती है तथा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज हो सकती है। कानून के तहत संबंधित व्यक्ति केंद्र सरकार से अपना नाम सूची से हटाने की मांग कर सकता है और आवश्यकता पड़ने पर रिव्यू कमेटी अथवा अदालत का भी रुख कर सकता है।