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"कानपुर मेरा घर है, मैं यहां अक्सर आता रहता हूं" : बृजेश पाठक

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दक्षिण का 100 बेड अस्पताल अब तक नहीं हुआ

जगनायक प्रधान
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने बुधवार को बिरहाना रोड स्थित केपीएम अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न वार्डों का दौरा कर मरीजों से बातचीत की और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का जायजा लिया। मरीजों से उन्होंने पूछा कि इलाज ठीक से मिल रहा है या नहीं तथा किसी प्रकार की धन उगाही तो नहीं की जा रही है। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल प्रशासन को व्यवस्थाएं और बेहतर करने के निर्देश भी दिए। मीडिया से बातचीत में बृजेश पाठक ने कहा कि कानपुर उनका घर है और वह यहां लगातार आते रहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार शहर में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है और आम जनता को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। डिप्टी सीएम के इस दौरे के बीच दक्षिण कानपुर का बहुप्रतीक्षित 100 बेड अस्पताल भी चर्चा में बना हुआ है। कुछ वर्ष पहले इस अस्पताल परियोजना को लेकर बड़े दावे किए गए थे। कहा गया था कि "अब जाम में फंसकर हैलट नहीं जाना पड़ेगा", "घर के पास बेहतर इलाज मिलेगा", "दक्षिण कानपुर की 20 लाख आबादी को बड़ी राहत मिलेगी"— कुछ साल पहले 100 बेड अस्पताल परियोजना को लेकर ऐसे ही बड़े-बड़े दावे किए गए थे। करीब 42 से 45 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह अस्पताल आज भी पूरी तरह से जनता के लिए शुरू नहीं हो सका है। नतीजा यह है कि जिस अस्पताल से हजारों मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद थी, वह अब लोगों के बीच सवालों और नाराजगी का विषय बनता जा रहा है और अस्पताल परिसर के आसपास अतिक्रमण की स्थिति बनने लगी है। क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि यदि समय रहते अस्पताल शुरू नहीं हुआ तो इसका असर राजनीतिक रूप से भी देखने को मिल सकता है। लोगों का कहना है कि विकास केवल शिलान्यास और उद्घाटन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका लाभ भी जनता तक पहुंचना चाहिए। चुनावी माहौल नजदीक आने के साथ यह मुद्दा जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन सकता है। लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि कहीं ऐसा न हो कि अस्पताल शुरू होने से पहले ही उसके "नवीनीकरण" के लिए नया बजट मंजूर करना पड़ जाए। जनता का सीधा सवाल है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी अस्पताल बंद क्यों है और दक्षिण कानपुर को उसका हक कब मिलेगा? अब नजरें शासन और स्वास्थ्य विभाग पर हैं। सवाल सिर्फ एक अस्पताल का नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों की उम्मीदों का है जो वर्षों से अपने इलाके में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं। केपीएम अस्पताल के निरीक्षण के दौरान डिप्टी सीएम ने अस्पताल प्रशासन से संसाधनों, डॉक्टरों और स्टाफ की उपलब्धता की जानकारी ली तथा आवश्यक प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। वहीं आईटीबीपी जवान प्रकरण पर उन्होंने कहा कि मामले की उच्चस्तरीय जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) उत्तर प्रदेश सरकार दयाशंकर सिंह, क्षेत्रीय अध्यक्ष, प्रकाश पाल , जिलाध्यक्ष कानपुर दक्षिण शिवराम सिंह उपस्थित रहे।

केपीएम अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का उपचार किया जा रहा है और हमारी कोशिश है कि हर मरीज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें। मैंने अस्पताल परिसर में पेयजल व्यवस्था और मरीजों के तीमारदारों के बैठने की सुविधाओं को और बेहतर करने के निर्देश दिए हैं। भवन में जहां भी मरम्मत की आवश्यकता है, उसे जल्द पूरा कराया जाएगा। हमारी सरकार की प्राथमिकता है कि आम जनता को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। आईटीबीपी जवान प्रकरण को भी सरकार गंभीरता से ले रही है। मैंने वरिष्ठ अधिकारियों से बात की है। पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। — बृजेश पाठक