
15 दिन में जवाब दो वरना होगी कार्रवाई :मंडलायुक्त
तनिश सिंह
पारदर्शी विकास न्यूज़ उन्नाव। नगर पालिका परिषद उन्नाव में कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। लखनऊ मंडलायुक्त द्वारा गठित तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति की रिपोर्ट में कुल 17 आरोपों में से 5 आरोप प्रथम दृष्टया सिद्ध पाए गए हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद शासन ने नगर पालिका अध्यक्ष श्वेता मिश्रा से 15 दिनों के भीतर साक्ष्यों सहित विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। चेतावनी दी गई है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार सबसे गंभीर अनियमितताएं श्रमिक भर्ती और टेंडर प्रक्रिया में पाई गई हैं। समिति ने पाया कि जेम पोर्टल के माध्यम से जारी निविदाओं में शासनादेशों का पालन नहीं किया गया। कई मामलों में कम दर देने वाली फर्मों को स्पष्ट कारण बताए बिना बाहर कर दिया गया, जबकि कुछ निविदाओं को निरस्त कर दोबारा प्रक्रिया अपनाई गई। समिति ने इसे नियमों के विपरीत माना है।गौशालाओं के लिए चारा खरीद के मामले में भी प्रक्रिया संबंधी खामियां उजागर हुई हैं। जांच में सामने आया कि निर्धारित नियमों का पालन किए बिना निविदाएं निरस्त कर पुनः टेंडर जारी किए गए। समिति ने इसे भी अनियमितता की श्रेणी में रखा है।डंपिंग यार्ड से अवैध मिट्टी खनन का मामला भी जांच में सही पाया गया। निरीक्षण के दौरान लगभग 600 घन मीटर मिट्टी निकाले जाने की पुष्टि हुई, लेकिन नगर पालिका यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि मिट्टी का उपयोग किस कार्य में किया गया। इस पर समिति ने गंभीर आपत्ति दर्ज की है।स्वच्छ भारत मिशन के तहत खरीदे गए डस्टबिन और अन्य सामग्री के वितरण में भी अनियमितताएं सामने आई हैं। पालिका प्रशासन ने 4000 डस्टबिन खरीदने के दस्तावेज तो प्रस्तुत किए, लेकिन उनके वितरण का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जा सका। जांच समिति ने इस आरोप को आंशिक रूप से सिद्ध माना है।वहीं पड़ाव अड्डा संचालन के मामले में भी नियमों की अनदेखी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-25 में नई निविदा प्रक्रिया अपनाने के बजाय पूर्व संचालक फर्म को ही सेवा विस्तार दे दिया गया। इससे अन्य कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बोली लगाने का अवसर नहीं मिला और नगर पालिका को संभावित राजस्व हानि हुई।जांच रिपोर्ट शासन को सौंपे जाने के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें नगर पालिका अध्यक्ष के जवाब और शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

ये आरोप सही मिले1. श्रमिक आपूर्ति के लिए जेम निविदाएं नियम विरुद्ध पाई गईं। बिना कारण बताए कई निविदाएं रद्द कर मनमानी फर्मों को काम दिया गया। गोशाला में भूसा आपूर्ति में भी गड़बड़ी सामने आई है। न्यूनतम दर वाली फर्म के बजाय अधिक दर पर भूसा खरीदा गया। इससे नगर पालिका को राजस्व का नुकसान हुआ। यह खरीद प्रक्रिया नियमों के विपरीत पाई गई है।
2. पड़ाव अड्डा संचालन में अनुभव की शर्त को बोर्ड की सहमति के बिना हटा दिया गया। चहेती फर्मों को काम देकर बार-बार समयावधि बढ़ाई गई। पुलिस ने 22 अक्तूबर 2024 को अवैध वसूली के आरोप में प्राथमिकी भी दर्ज की थी। इसके बावजूद दागी फर्मों को संरक्षण दिया गया। जिलाधिकारी के निर्देशों का उल्लंघन कर अवैध वसूली जारी रही।
3. स्वच्छ भारत मिशन के तहत 10 हजार डस्टबिन और झोले बांटने का दावा गलत पाया गया। जांच में केवल चार हजार डस्टबिन खरीदने की बात सामने आई पर वितरण का पूरा विवरण नहीं मिला।
4. कर निर्धारण में मनमानी और गलत गृहकर व जल कर निर्धारण के आरोप भी साबित हुए हैं। शासनादेशों के विपरीत मनमाने ढंग से कर निर्धारित कर वसूली की जा रही है। इससे पालिका की आय को क्षति पहुंचाई गई है। कुछ व्यावसायिक संस्थानों का गृहकर और जल कर निर्धारण भी गलत पाया गया।
5. सुंदरीकरण के लिए खजूर के पेड़ खरीदने में भी अनियमितता मिली। पेड़ों की खरीद जेम पोर्टल के बजाय ई-निविदा से की गई। हुसैन नगर स्थित कूड़ा डंपिंग स्थल से 600 घनमीटर अवैध मिट्टी खनन भी पाया गया जिसका उपयोग कहां हुआ इसका कोई अभिलेख नहीं है।