

वैध राज कुमार शुक्ला
पारदर्शी विकास न्यूज़
गर्मी का मौसम आते ही तापमान लगातार बढ़ने लगता है। मई और जून के महीनों में कई क्षेत्रों में तेज धूप और लू लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती है। सबसे अधिक खतरा छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को होता है। छोटे बच्चे अपनी परेशानी सही तरीके से बता नहीं पाते, इसलिए माता-पिता और परिवार के लोगों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे उनका विशेष ध्यान रखें। यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए तो लू लगने, डिहाइड्रेशन, बुखार और कई अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में बच्चों की देखभाल बहुत जरूरी हो जाती है। छोटे बच्चों का शरीर बड़ों की तुलना में अधिक संवेदनशील होता है। तेज गर्मी में उनके शरीर से पानी तेजी से निकलता है, जिससे कमजोरी और चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों की त्वचा भी बहुत नाजुक होती है, इसलिए धूप का असर उन पर जल्दी पड़ता है। यही कारण है कि डॉक्टर हमेशा बच्चों को तेज धूप से बचाने की सलाह देते हैं।गर्मी के मौसम में सबसे जरूरी है कि बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ दिए जाएं। छोटे बच्चों को बार-बार पानी पिलाना चाहिए। यदि बच्चा बहुत छोटा है तो मां का दूध सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता। बड़े बच्चों को नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ, लस्सी और ताजे फलों का रस दिया जा सकता है। बाजार में मिलने वाले अत्यधिक ठंडे और रंगीन पेय पदार्थ बच्चों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, इसलिए उनसे बचना चाहिए।खानपान का भी बच्चों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है। गर्मी में बच्चों को हल्का, ताजा और पौष्टिक भोजन देना चाहिए। तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, आम और पपीता जैसे मौसमी फल शरीर को ठंडक देते हैं और पानी की कमी पूरी करते हैं। बच्चों को ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और बाहर का खाना नहीं खिलाना चाहिए। बासी भोजन से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हमेशा ताजा भोजन ही देना चाहिए।तेज धूप में बच्चों को बाहर ले जाने से बचना चाहिए। सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक धूप सबसे अधिक तेज होती है। इस समय बच्चों को घर के अंदर ही रखना बेहतर होता है। यदि किसी जरूरी काम से बाहर जाना पड़े तो बच्चों को हल्के रंग के सूती कपड़े पहनाने चाहिए। सिर पर टोपी या कपड़ा रखना चाहिए ताकि सीधी धूप से बचाव हो सके। बच्चों की आंखों को धूप से बचाने के लिए छाता या कैप का उपयोग भी किया जा सकता है।गर्मी में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। अधिक पसीना आने से बच्चों को घमौरियां और त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। बच्चों को रोज नहलाना चाहिए और शरीर को साफ रखना चाहिए। बहुत अधिक पसीना आने पर कपड़े बदल देना चाहिए। बच्चों के कमरे में पर्याप्त हवा और ठंडक होनी चाहिए। यदि कूलर या पंखा चल रहा हो तो ध्यान रखें कि हवा सीधे बच्चे पर न लगे।लू लगने के कुछ सामान्य लक्षण होते हैं, जिन्हें पहचानना बहुत जरूरी है। यदि बच्चा अचानक सुस्त हो जाए, तेज बुखार आए, उल्टी हो, शरीर गर्म लगे, बार-बार रोए या चक्कर आने जैसी शिकायत करे तो यह लू के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत बच्चे को ठंडी जगह पर ले जाना चाहिए और शरीर पर ठंडे पानी की पट्टी रखनी चाहिए। डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना भी जरूरी है।आजकल कई माता-पिता बच्चों को मोबाइल और टीवी में व्यस्त रखकर उनकी देखभाल पूरी मान लेते हैं, लेकिन गर्मी में बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रखना भी आवश्यक है। बच्चों को घर के अंदर ऐसे खेल खेलने चाहिए जिनसे वे खुश रहें और थकान महसूस न करें। उन्हें समय-समय पर आराम भी देना चाहिए।स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए भी विशेष सावधानी जरूरी है। बच्चों को स्कूल भेजते समय पानी की बोतल अवश्य देनी चाहिए। टिफिन में हल्का और पौष्टिक भोजन रखना चाहिए। यदि अत्यधिक गर्मी हो और प्रशासन द्वारा चेतावनी जारी की गई हो तो बच्चों को घर पर रखना ही बेहतर होता है। कई बार बच्चे खेलते समय पानी पीना भूल जाते हैं, इसलिए अभिभावकों और शिक्षकों को इस बात पर ध्यान देना चाहिए।गर्मी के मौसम में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। दूषित पानी और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ बच्चों को बीमार कर सकते हैं। इसलिए बच्चों को हमेशा साफ और उबला हुआ पानी पिलाना चाहिए। बाहर की आइसक्रीम, कटे हुए फल और खुला खाना खिलाने से बचना चाहिए। हाथ धोने की आदत भी बच्चों को जरूर सिखानी चाहिए।छोटे शिशुओं का ध्यान और अधिक सावधानी से रखना चाहिए। उन्हें ज्यादा कपड़े पहनाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर का तापमान बढ़ सकता है। शिशु यदि बार-बार रो रहा हो या दूध कम पी रहा हो तो यह गर्मी से परेशानी का संकेत हो सकता है। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।गर्मी केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक प्रभाव भी डालती है। अत्यधिक गर्मी में बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हैं और ठीक से सो नहीं पाते। इसलिए घर का वातावरण शांत और आरामदायक होना चाहिए। बच्चों को पर्याप्त नींद मिलना भी बहुत जरूरी है।आज के समय में तापमान लगातार बढ़ रहा है और गर्मी पहले की तुलना में अधिक खतरनाक होती जा रही है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य विभाग को भी लोगों को जागरूक करना चाहिए कि गर्मी और लू से बच्चों को कैसे बचाया जाए।अंत में कहा जा सकता है कि छोटे बच्चे परिवार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी और भविष्य होते हैं। गर्मी और लू के मौसम में थोड़ी सी लापरवाही उनके स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। इसलिए बच्चों को पर्याप्त पानी देना, पौष्टिक भोजन खिलाना, तेज धूप से बचाना और साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। यदि सही सावधानी बरती जाए तो बच्चे गर्मी के मौसम में भी स्वस्थ और सुरक्षित रह सकते हैं।