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बंगाल में SIR विवाद के बीच बड़ी प्रशासनिक नियुक्तियां, कांग्रेस और TMC ने उठाए सवाल

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PARDARSHI VIKASH NEWS पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच राज्य प्रशासन में अहम बदलाव किए गए हैं। सुवेंदु सरकार ने चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल को राज्य का नया चीफ सेक्रेटरी नियुक्त किया है। मनोज अग्रवाल ने विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में SIR प्रक्रिया की देखरेख की थी, जिसके दौरान करीब 91 लाख वोटरों के नाम सूची से हटाए गए थे।इसके साथ ही रिटायर्ड IAS अधिकारी सुब्रत गुप्ता को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त किया गया है। सुब्रत गुप्ता भी SIR प्रक्रिया के दौरान ऑब्जर्वर की भूमिका निभा चुके हैं।कांग्रेस ने इन नियुक्तियों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और भाजपा के बीच मिलीभगत से SIR प्रक्रिया को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया। कांग्रेस का दावा है कि इस प्रक्रिया में लगभग 27 लाख लोगों को वोट देने से रोका गया, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुए।तृणमूल कांग्रेस ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। TMC नेता साकेत गोखले ने इसे बेहद बेशर्मी भरा कदम बताया, जबकि सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने इसे महज संयोग कहा। पार्टी का कहना है कि इन घटनाओं से चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।TMC सांसद सागरिका घोष ने कहा कि जिस अधिकारी ने चुनाव के दौरान “न्यूट्रल अंपायर” की भूमिका निभाई, उसे अब सरकार में बड़ा पद देना चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।मनोज अग्रवाल 1990 बैच के IAS अधिकारी हैं और IIT कानपुर से पढ़े हैं। वे मौजूदा मुख्य सचिव की जगह लेंगे, हालांकि उनका कार्यकाल छोटा रहेगा क्योंकि वे जल्द ही रिटायर होने वाले हैं। वहीं सुब्रत गुप्ता भी 1990 बैच के रिटायर्ड IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने SIR प्रक्रिया के दौरान ऑब्जर्वर के रूप में काम किया था।SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर बंगाल की राजनीति पहले से ही गरमाई हुई है। विपक्ष का आरोप है कि इसका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया, जबकि सरकार इसे एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है।इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिकाएं लंबित हैं, जहां TMC ने 31 विधानसभा सीटों के नतीजों को चुनौती दी है।