
कसया, कुशीनगर। पांच गांवों के ग्रामीणों को वर्ष 1994 में पट्टे के रूप में मिली जमीन पर 32 वर्ष बाद भी कब्जा नहीं मिल सका है। सोमवार को ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी जी. अक्षय दीपक से शिकायत कर मामले की जांच कराने और पट्टे की जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग की।ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व अभिलेखों में पट्टाधारकों के नाम दर्ज हैं, लेकिन मौके पर दूसरे लोग वर्षों से जमीन पर खेती कर रहे हैं। तहसील प्रशासन की ओर से जमीन पर स्थगन आदेश लागू होने की बात कही जा रही है। इस पर ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि वास्तव में कोई स्थगन आदेश है तो उसकी प्रति उन्हें उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना था कि यदि ऐसा कोई आदेश नहीं है तो पात्र पट्टाधारकों को उनकी जमीन पर तत्काल कब्जा दिलाया जाए।शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जिन पट्टाधारकों के नाम खतौनी में दर्ज हैं, उनका भी मौके पर कब्जा नहीं है और कथित रूप से स्थगन आदेश लेने वाले व्यक्ति का भी जमीन पर कब्जा नहीं है। इसके बावजूद कुछ अन्य लोग लंबे समय से इन जमीनों पर खेती कर रहे हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर किस आदेश के आधार पर तीसरे व्यक्तियों को पट्टे की जमीन पर खेती करने की अनुमति दी जा रही है।ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन से खतौनी में दर्ज अभिलेखों और मौके की स्थिति का मिलान कराकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही जमीन को कब्जामुक्त कराकर वास्तविक पट्टाधारकों को कब्जा दिलाने की मांग रखी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच रिपोर्ट सामने नहीं आती और समस्या का समाधान नहीं होता है तो वे धरना-प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगेंगे।ज्वाइंट मजिस्ट्रेट जी. अक्षय दीपक ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि शीघ्र ही टीम गठित कर मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच के आधार पर पात्र पट्टाधारकों को न्याय दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।इस दौरान प्रियेश गोड़, अविनाश गोड़, गायत्री देवी, हिमती देवी, सुनीता देवी, किरन देवी, रमेश प्रसाद, रवींद्र प्रजापति, रामपरीक्षन देवी, बासमती देवी, शिवसागर, सुमंत प्रसाद, सिंहासन प्रसाद, जंगबहादुर, रामनाथ, दिनानाथ प्रसाद, रामबहान, तारा, कमला देवी सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।