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विनीत मिनोचा हत्याकांड: पुलिस कस्टडी में मोबाइल फिर भी एक्टिव? बहू शालू के वकील ने जांच पर उठाए सवाल

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पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस जांच को लेकर नए सवाल सामने आए हैं। जेल में बंद आरोपी बहू शालू मिनोचा के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने दावा किया है कि पुलिस ने शालू का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है, लेकिन इसके बावजूद मोबाइल से जुड़े इंस्टाग्राम अकाउंट का लास्ट सीन शनिवार सुबह 10:03 बजे तक दिखाई दिया। अधिवक्ता ने सवाल उठाया कि यदि संबंधित मोबाइल पुलिस की कस्टडी में है तो आखिर वह एक्टिव कैसे रहा और उसे कौन संचालित कर रहा है।अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने शनिवार को एक वीडियो जारी कर पुलिस जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 5 सितंबर की रात दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के बाद पुलिस ने मामले में शालू मिनोचा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पुलिस ने पूछताछ के दौरान उसका मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में लिया था। अब मोबाइल या उससे जुड़े अकाउंट के सक्रिय दिखाई देने के दावे के बाद जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।अधिवक्ता का कहना है कि शनिवार सुबह इंस्टाग्राम पर शालू के अकाउंट का लास्ट सीन 10:03 बजे तक दिखाई दिया। उन्होंने दावा किया कि यदि फोन वास्तव में पुलिस के कब्जे में है, तो इसकी जांच होनी चाहिए कि मोबाइल अथवा उससे जुड़ा अकाउंट किस तरह सक्रिय दिखाई दे रहा है। साथ ही उन्होंने आशंका जताई कि यदि किसी तीसरे व्यक्ति के पास मोबाइल या उससे जुड़ी पहुंच है तो चैट, वीडियो या अन्य डाटा के बाहर आने की भी जांच की जानी चाहिए।इस मामले में डीसीपी वेस्ट एस.एम. कासिम आबिदी ने बताया कि पुलिस को शालू के एक मोबाइल की जानकारी थी, जिसे कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। उनके अनुसार उस मोबाइल में दो नंबर एक्टिव हैं। वकील किस मोबाइल नंबर अथवा किस अकाउंट के सक्रिय होने की बात कर रहे हैं, इसकी जांच की जाएगी। जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।शालू के अधिवक्ता ने जांच में मोबाइल नंबरों की पहचान को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि शालू के नाम से कितने मोबाइल नंबर सक्रिय हैं और पुलिस के कब्जे में कौन-कौन से डिवाइस या सिम हैं। वहीं शालू की बहन सोनिया मेहरोत्रा के अनुसार शालू के पास दो मोबाइल नंबर थे और दोनों सिम एक ही हैंडसेट में इस्तेमाल किए जाते थे। परिवार का कहना है कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने शालू का मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया था।अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने मामले की जांच को लेकर एक और बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि विनीत मिनोचा की हत्या के बाद उनके बेटे सुब्रत के बैंक और बिरहाना रोड स्थित दुकान जाने की जानकारी की भी जांच की जानी चाहिए। अधिवक्ता का कहना है कि जांच से जुड़े सभी तथ्यों को विवेचक के संज्ञान में दिया गया है और हर पहलू की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि कोई निर्दोष न फंसे।उन्होंने आरोप लगाया कि शालू के खिलाफ एक अलग माहौल तैयार किया जा रहा है, जिससे विवेचना प्रभावित हो सकती है। हालांकि यह अधिवक्ता का पक्ष है और मामले में पुलिस की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल नंबर और अकाउंट के सक्रिय होने से जुड़े सभी दावों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।गौरतलब है कि विनीत मिनोचा हत्याकांड में शालू मिनोचा पर हत्या की साजिश रचने का आरोप है और वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है। मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे जारी है।अब सबसे बड़ा सवाल यही है—जिस मोबाइल को पुलिस कस्टडी में होने का दावा किया जा रहा है, उससे जुड़ा अकाउंट एक्टिव क्यों दिखाई दिया? और अगर यह दावा सही है तो उस तक पहुंच आखिर किसकी है? इन सवालों का जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा।