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दिल्ली से मुंबई तक चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग

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पारदर्शी विकास न्यूज़। गांधी जयंती पर शुक्रवार को दिल्ली से मुंबई तक चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुए। दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विरोध जताया, वहीं मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रदर्शन कर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। दोनों शहरों में पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। दिल्ली में आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक संजीव झा सहित कई नेता प्रदर्शन में शामिल हुए। जंतर-मंतर और आसपास पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। आप नेताओं ने एसआईआर और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटने का मुद्दा नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा है। वहीं, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य डुप्लीकेट और अयोग्य प्रविष्टियों को हटाना है। एसआईआर की प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। उधर, मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी ने पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद अपना जेल भरो आंदोलन किया। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा और अन्य लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। सीजेपी ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग भी रखी। मुंबई में प्रदर्शन के दौरान युवाओं के साथ परिवारों और बच्चों की मौजूदगी भी देखने को मिली। एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि वह अपने बच्चों के साथ पुणे से मुंबई आया है। प्रदर्शनकारियों ने मतदान के अधिकार और चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर अपनी चिंता जताई। दिल्ली और मुंबई में हुए इन प्रदर्शनों ने एसआईआर और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर जारी विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। एक ओर प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं आयोग की ओर से पुनरीक्षण को मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया बताया गया है।