
पारदर्शी विकास न्यूज़ वाराणसी। काशी में विराजमान ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से तीन जगद्गुरुओं सहित विभिन्न संतों ने श्रीविद्यामठ में भेंट कर आध्यात्मिक विषयों पर विमर्श किया और उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।इस अवसर पर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी योगेश्वराचार्य, स्वामी अवधेशानंद और स्वामी सारंगधराचार्य सहित स्वामी चंद्रप्रकाशाचार्य, धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडे, अनिरुद्ध रामानुज दास और पंडित दिनेश शर्मा मौजूद रहे। संतों ने शंकराचार्य को अंगवस्त्र, भगवान जगन्नाथ का महाप्रसाद और डॉ. अंकिता द्वारा रचित पुस्तक ‘सनातन शाश्वत’ भेंट कर सम्मानित किया। श्रीविद्यामठ में उपस्थित बटुकों, विद्वानों और संतों को भी अंगवस्त्र व महाप्रसाद वितरित किया गया।संतों ने धर्म और गौ-रक्षा के लिए शंकराचार्य द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म और गौमाता की रक्षा के लिए संत समाज उनके साथ खड़ा है।शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि वे पद की शोभा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि धर्म की रक्षा के लिए शंकराचार्य बने हैं। उन्होंने गौमाता और धर्म की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करने की प्रतिबद्धता जताई।जगद्गुरु स्वामी योगेश्वराचार्य ने गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग करते हुए कहा कि इस विषय पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।