
PARDARSHI VIKASH NEWS इटावा। ताखा क्षेत्र के ग्राम नगला बले में चल रही श्रीमद्भागवत पुराण कथा के छठे दिन कथा व्यास किशोरी वैष्णवी गर्ग ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए और पूरे पंडाल में भक्तिमय वातावरण बना रहा।कथा व्यास ने बताया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी माता लक्ष्मी का स्वरूप हैं तथा भगवान श्रीकृष्ण स्वयं नारायण के अवतार हैं। उन्होंने कहा कि धन और संपत्ति का उपयोग धर्म, सेवा और परोपकार के कार्यों में करना चाहिए। लक्ष्मी का सदुपयोग जीवन में सुख-समृद्धि लाता है, जबकि दुरुपयोग से उसका नाश हो जाता है।कथा के दौरान महारास प्रसंग का भी विस्तार से वर्णन किया गया। व्यास पीठ से बताया गया कि गोपियों का श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम और पूर्ण समर्पण जीवात्मा तथा परमात्मा के दिव्य मिलन का प्रतीक है। महारास का संदेश भक्तों को प्रभु भक्ति, आत्मिक जागरण और आध्यात्मिक उन्नति की प्रेरणा देता है।किशोरी वैष्णवी गर्ग ने पुरुषोत्तम मास के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस पवित्र मास को स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अपना नाम प्रदान किया था। उन्होंने कहा कि इस माह में श्रीमद्भागवत श्रवण, जप, तप, अन्नदान और धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। यह मास मन की शुद्धि, प्रभु प्रेम और आध्यात्मिक विकास का संदेश देता है।कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम के मुख्य यजमान परीक्षित वीरेंद्र सिंह एवं राजन श्री रहे। इस अवसर पर ग्रामवासी और आसपास के क्षेत्रों से आए श्रद्धालु ब