
पारदर्शी विकास ब्यूरो
कुशीनगर। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में गुरुवार शाम कलेक्ट्रेट सभागार में राजस्व विभाग के कार्यों की मासिक समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वैभव मिश्रा समेत जिले की सभी तहसीलों के उप जिलाधिकारी और तहसीलदार मौजूद रहे। इस दौरान राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों, जनसुनवाई, आईजीआरएस शिकायतों, भूमि विवादों, चकरोड और संपर्क मार्गों को अतिक्रमण मुक्त रखने सहित विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा की गई। राजस्व वादों की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने एक वर्ष या उससे अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने धारा 24, 33, 67, 80, 98(1) और 116 समेत विभिन्न धाराओं के लंबित वादों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी न हो और प्रत्येक प्रकरण में नियमानुसार गुणवत्तापूर्ण कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जनसुनवाई एवं आईजीआरएस शिकायतों की समीक्षा करते हुए डीएम ने कहा कि शिकायतों का निस्तारण महज औपचारिकता नहीं होना चाहिए। संबंधित अधिकारी स्वयं प्रकरण की जांच करें और आवश्यकता पड़ने पर शिकायतकर्ता से वार्ता कर उसकी समस्या को समझें। शिकायतकर्ता की संतुष्टि के साथ गुणवत्तापूर्ण समाधान होने के बाद ही प्रकरण का निस्तारण किया जाए। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी। डीएम ने ग्रामीण क्षेत्रों के चकरोड एवं सार्वजनिक संपर्क मार्गों को अतिक्रमण मुक्त रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी गांव के चकरोड या संपर्क मार्ग पर अतिक्रमण की शिकायत जिला मुख्यालय तक पहुंचती है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। बैठक में लंबित रिट याचिकाओं, ऑडिट आपत्तियों, अमल दरामद, खतौनी, भूमि विवाद तथा आर्म्स लाइसेंस के वरासत प्रकरणों की भी समीक्षा हुई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को लंबित मामलों की नियमित समीक्षा कर समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग सीधे आमजन की भूमि संबंधी समस्याओं से जुड़ा है। ऐसे में अधिकारियों को संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करना चाहिए, ताकि लोगों को अनावश्यक रूप से तहसील और राजस्व न्यायालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। बैठक के अंत में उन्होंने सभी अधिकारियों को शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप राजस्व कार्यों में तेजी लाने और दिए गए निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।