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महिला आरक्षण के मुद्दे पर गर्म हुई सियासत,विपक्ष के रोल से महिलाओं में नाराजगी बढ़ी

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सपा नेताओं ने अर्पणा यादव के विरुद्ध हजरतगंज थाने में दी तहरीर

 

 

 

 

 संजीव भारती 
pardarshi vikas news लखनऊ। 
महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति गर्म है। भाजपा और सपा आमने-सामने हैं।सपा के नेताओं ने महिला आयोग की उपाध्यक्ष अर्पणा यादव के विरुद्ध हजरतगंज थाने में तहरीर दी है। सरकार की ओर से नारी शक्ति वंदन विधेयक को लेकर जागरूकता कार्यक्रम जारी है।  संसद में महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त आक्रोश है। नौकरी पेशा और राजनीति में सक्रिय महिलाएं विपक्ष की तीखी आलोचना कर रही है। रविवार को भाजपा और सपा की ओर से आयोजित प्रेस-वार्ता में एक दूसरे के विरुद्ध जमकर बयानबाजी हुई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव प्रदीप कुमार के साथ सपा नेताओं ने हज़रतगंज थाने में महिला आयोग की उपाध्यक्ष अर्पणा यादव के विरुद्ध तहरीर देकर सुसंगत धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की है। अर्पणा यादव ने शुक्रवार की देर शाम विपक्ष के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई और विधानसभा के सामने समाजवादी पार्टी के झंडे को जला दिया था। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा है कि कांग्रेस,सपा और इंडी गठबंधन के लोग इस बात से डरते हैं कि जिस दिन महिलाएं आगे आ जायेंगी,उस दिन परिवारवाद का अंत हो जाएगा। महिला आरक्षण के मामले में विपक्ष ने गलत आचरण दिखाया है। उधर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल पर सरकार की हार भाजपा की बदनीयती की हार है। लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी महिलाएं इनको हराएंगी। भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता रश्मि सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण बिल को गिराकर विपक्ष ने जो ऐतिहासिक भूल की है, इसके लिए सपा, कांग्रेस और तृणमूल मूल कांग्रेस को भारी नुक़सान उठाना होगा।देश की आधी आबादी इन्हें माफ करने वाली नहीं।

 

इनसेट 

 

पी एम के राष्ट्र के नाम संदेश को खूब शेयर कर रहे भाजपाई 
महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश सुर्खियों में है। भाजपा के कार्यकर्ताओं की ओर से यह संदेश खूब शेयर किया जा रहा है। महिलाएं संदेश को गौर से सुन रही है। उधर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से रविवार को की गई प्रेसवार्ता का सहारा लेकर सपा के कार्यकर्ता सरकार के विरुद्ध जीत की खुशी मना रहे हैं।

 

 

 

बसपा ने बयानबाजी से खुद को अलग किया 
महिला आरक्षण बिल के समर्थन में बसपा सुप्रीमो मायावती ने सबसे पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी।सदन में चर्चा के दौरान कांग्रेस और सपा के दृष्टिकोण को लेकर भी बसपा सुप्रीमो ने तीखी आलोचना की थी ‌‌। संसद में बिल गिरने के बाद बहुजन समाज पार्टी की ओर से कोई बयान नहीं आया है। पार्टी के सभी बड़े नेता 2027के चुनाव की तैयारी में कैडर बैठकें करने में लगे हुए हैं।

 

महिला आरक्षण बिल को गिराकर विपक्ष ने बहुत बड़ी ग़लती की है।इसका नुकसान आने वाले चुनावों में उठाना पड़ेगा। महिलाएं अब इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। वास्तव में आजादी के बाद केन्द्र में बनी कांग्रेस और विपक्षी दलों की किसी भी सरकार ने महिला आरक्षण को ‌लागू करने के लिए ईमानदारी से प्रयास नहीं किया। 50 फीसदी न सही जिस तरह पंचायतों में आरक्षण मिला है,कम से कम उतना आरक्षण महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में जरूर मिलना चाहिए। -डा आशा गुप्ता ,वरिष्ठ प्रोफेसर, संस्कृत विभाग ,आर आर पी जी कालेज अमेठी