
PARDARSHI VIKASH NEWS राहुल गांधी ने सोमवार को पश्चिम एशिया में जारी संकट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया ‘सात अपीलों’ पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह सलाह नहीं, बल्कि सरकार की विफलता का संकेत है और अब देश चलाना प्रधानमंत्री के बस में नहीं रह गया है।राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कल मोदी जी ने जनता से त्याग मांगा। सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, खाद और खाने के तेल का उपयोग घटाओ, मेट्रो से चलो, घर से काम करो। ये उपदेश नहीं हैं, ये विफलता हैं।” उन्होंने कहा कि 12 साल में देश को ऐसी स्थिति में पहुंचा दिया गया है कि अब लोगों को बताया जा रहा है कि क्या खरीदना है और क्या नहीं, कहां जाना है और कहां नहीं। राहुल का यह बयान प्रधानमंत्री मोदी के रविवार को सिकंदराबाद में दिए गए भाषण के बाद आया है, जिसमें उन्होंने आयात पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की थी।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत के पास तेल के बड़े भंडार नहीं हैं और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर पड़ रहा है। उन्होंने लोगों से पेट्रोल और डीजल का कम उपयोग करने, वर्क फ्रॉम होम अपनाने, मेट्रो और कारपूलिंग का इस्तेमाल बढ़ाने की अपील की थी। साथ ही खाने के तेल और रासायनिक उर्वरकों की खपत घटाने तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही थी। उन्होंने कुछ समय के लिए विदेश यात्राएं टालने और सोने की खरीद कम करने की भी सलाह दी थी।इस मुद्दे पर विपक्ष के अन्य नेताओं ने भी सरकार को घेरा। जयराम रमेश ने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति सरकार के दावों से कहीं ज्यादा गंभीर है। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार अर्थव्यवस्था और विदेश नीति दोनों संभालने में विफल रही है और चुनाव खत्म होते ही सरकार को अचानक संकट याद आ गया। वहीं साकेत गोखले ने सवाल उठाया कि अगर विदेशी मुद्रा संकट जैसी स्थिति है तो केवल आम नागरिकों से ही त्याग की अपेक्षा क्यों की जा रही है।आर्थिक आंकड़ों के मुताबिक भारत में सोने के आयात पर हर साल भारी विदेशी मुद्रा खर्च हो रही है। 2025-26 में सोने के आयात का आंकड़ा लगभग 6.40 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। विदेश यात्राओं पर भारतीयों का खर्च भी बढ़कर करीब 3.65 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इसी तरह उर्वरकों के आयात पर लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए खर्च हुए, जबकि कच्चे तेल के आयात पर 2025-26 में करीब 10.35 लाख करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से यह बोझ और बढ़ सकता है।