
बसपा सुप्रीमो ने की हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर राज्य के पार्टी संगठन के कार्यों की समीक्षा
PARDARSHI VIKASH NEWS लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी के सेंट्रल कार्यालय लखनऊ में शुक्रवार को बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष,कई बार की सांसद और उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रहीं बहन मायावती ने हिमांचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पार्टी संगठन के कार्यों की समीक्षा की और पदाधिकारियों को दोनों राज्यों में अपने वोट की सुरक्षा अपने आत्म सम्मान, अपनी इज्जत,जान-माल और मजहब की तरह करने तथा आम्बेडकरवादी मिशन का कारवां मंजिल तक पहुंचाने के संदेश दिए। बैठक के दौरान बसपा सुप्रीमो ने हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव के बाद राजनीतिक हालातों की समीक्षा की। बैठक के दौरान बसपा सुप्रीमो ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोग पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के लिए लम्बे समय से इंतजार कर रहे हैं,यह इंतजार अब जनता के लिए दुखदाई साबित हो रहा है।बैठक में मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों से क्षेत्रवार प्रगति रिपोर्ट प्राप्त करते हुए संगठनात्मक गतिविधियों को और अधिक सक्रिय बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चुनावी सफलता के लिए कार्यकर्ताओं को पूरे समर्पण और अनुशासन के साथ काम करना होगा तथा बहुजन समाज को पार्टी की विचारधारा और मिशन से व्यापक रूप से जोड़ना होगा।उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे बाबा साहेब भीमराव रामजी अम्बेडकर के अधूरे मिशन को पूरा करने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाएं और बहुजन समाज को अपने वोट की सुरक्षा, आत्मसम्मान तथा अधिकारों के प्रति जागरूक करें।बैठक में हाल ही में हिमाचल प्रदेश में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों के बाद की राजनीतिक परिस्थितियों की भी समीक्षा की गई। इस दौरान बसपा को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में जनता के सामने प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। पार्टी नेताओं ने बताया कि प्रदेश में पारंपरिक दलों के प्रति लोगों में असंतोष का माहौल दिखाई दे रहा है।जम्मू-कश्मीर इकाई की समीक्षा के दौरान पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किए जाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। बैठक में कहा गया कि लंबे समय से इस विषय पर निर्णय लंबित रहने के कारण लोगों में निराशा बढ़ रही है और इसका प्रभाव क्षेत्र के विकास तथा जनजीवन पर पड़ रहा है।मायावती ने कहा कि देश के अन्य राज्यों की तरह हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और पिछड़ेपन जैसी समस्याएं बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से सामाजिक न्याय और समानता के लिए संघर्ष को तेज करने तथा संगठन को और मजबूत बनाने का आह्वान किया।