
PARDARSHI VIKASH NEWS हमीरपुर जिले के विकास खंड क्षेत्र के बेरी गांव स्थित मां आदिभवानी मंदिर प्रांगण में चल रहे सतचंडी महायज्ञ के तीसरे दिन श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया गया। कथा का वाचन वृंदावन धाम से आए कथावाचक सुमित सरकार जी महाराज ने किया।कथा के दौरान महाराज श्री ने भगवान के चौबीस अवतारों और समुद्र मंथन की विस्तृत कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यह संपूर्ण संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा है, जिसमें चौरासी लाख योनियों के रूप में विविध जीवों का सृजन हुआ है।समुद्र मंथन की कथा का आध्यात्मिक अर्थ समझाते हुए उन्होंने बताया कि मानव हृदय ही वास्तव में संसार सागर है। इसमें उठने वाले अच्छे और बुरे विचार देवता और दानव के मंथन के समान हैं। यह मंथन कभी सकारात्मक विचारों का होता है तो कभी नकारात्मक भावनाओं का।उन्होंने आगे कहा कि जब मनुष्य के भीतर दानवी प्रवृत्तियां प्रबल होती हैं, तो उसका जीवन दुखों और कठिनाइयों से भर जाता है, जबकि दैवीय विचारों की प्रधानता से जीवन सुख, शांति और भक्ति भाव से परिपूर्ण हो जाता है। इसलिए मनुष्य को अपने विचारों पर नियंत्रण रखते हुए सदैव अच्छे विचारों को अपनाना चाहिए।कथा के प्रारंभ में भागवत भगवान का पूजन और आरती की गई। पंडित दीपक पुरोहित के सहयोग से बीच-बीच में भजन-कीर्तन भी हुआ, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा सुनने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।