
PARDARSHI VIKASH NEWS प्रवर्तन निदेशालय (ED) मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में अपनी 93% सफलता दर का दावा करता है, लेकिन यह आंकड़ा केवल उन 60 मामलों पर आधारित है जिनका ट्रायल पूरी तरह समाप्त हो चुका है। इनमें 56 मामलों में आरोप सिद्ध हुए, जबकि 4 मामलों में आरोपी बरी हो गए। यदि सभी दर्ज मामलों को आधार बनाया जाए, जिनमें अभी सुनवाई जारी है, तो वास्तविक सफलता दर बहुत कम होकर लगभग 1% से भी नीचे आ जाती है, क्योंकि कुल मामलों में से करीब 99% अभी अदालतों में लंबित हैं।संपत्ति कुर्की के आंकड़े भी स्थिति को अलग नजरिए से दिखाते हैं। ईडी ने अब तक बड़ी मात्रा में संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इनमें से केवल लगभग एक-तिहाई संपत्तियां ही स्थायी रूप से कुर्क हो पाई हैं। यानी कार्रवाई का दायरा बड़ा जरूर है, लेकिन उसका अंतिम कानूनी परिणाम सीमित मामलों तक ही पहुंच सका है।पिछले वर्षों में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों, गिरफ्तारियों और कुर्की की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई है, लेकिन ट्रायल पूरा होने और दोष सिद्ध होने की दर अपेक्षाकृत कम बनी हुई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जांच की गति और न्यायिक निष्कर्ष के बीच एक बड़ा अंतर मौजूद है, जो इन मामलों की जटिलता और लंबी कानूनी प्रक्रिया को दर्शाता है।