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डीएनटी समुदाय के संघर्ष और देशभक्ति की संक्षिप्त जानकारी

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पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। डीएनटी समुदाय के इतिहास में विमुक्त, घुमंतू और अर्ध घुमंतू जनजातियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ इन समुदायों ने अलग-अलग भूमिकाओं में संघर्ष किया। आमने-सामने मुकाबला करने वाले योद्धाओं को विमुक्त कहा गया, जबकि अंग्रेजी शासन की गतिविधियों पर नजर रखते हुए सूचनाएं पहुंचाने और रखवाली करने वालों को घुमंतू समुदाय से जोड़ा गया। वहीं अस्त्र-शस्त्र, रसद और गुरिल्ला युद्ध के माध्यम से देशभर में क्रांतिकारी गतिविधियों का नेटवर्क संचालित करने में अर्ध घुमंतू समुदाय की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

डॉ. रामानंद राजभर, प्रमुख महामंत्री, अखिल भारतीय राजभर महासभा ने कहा कि इन तीनों समुदायों ने आपसी सहयोग और एकजुटता के साथ गुलामी के खिलाफ संघर्ष किया। वर्ष 1871 में लागू क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट ने इन समुदायों को गंभीर सामाजिक और कानूनी परेशानियों का सामना कराया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी डीएनटी समुदाय की समस्याएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। सरकारों को उनके अधिकार, सम्मान, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। डीएनटी समुदाय देश का अभिन्न हिस्सा है और उसके इतिहास व योगदान को उचित सम्मान मिलना चाहिए।