
PARDARSHI VIKASH NEWS इटावा के लवेदी क्षेत्र स्थित यमुना नदी किनारे ग्राम रामगढ़ में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक पंडित इन्द्रेश शास्त्री ने भक्त प्रह्लाद और ध्रुव चरित्र की प्रेरणादायक कथाएं सुनाईं। उन्होंने कहा कि बच्चों को बचपन से ही धर्म, संस्कार और आध्यात्मिक ज्ञान देना आवश्यक है, क्योंकि प्रारंभिक अवस्था में मिले संस्कार जीवनभर उनका मार्गदर्शन करते हैं।कथावाचन के दौरान पंडित शास्त्री ने बताया कि भक्त प्रह्लाद ने माता कयाधु के गर्भ में ही नारायण मंत्र का श्रवण किया था, जिसके प्रभाव से वे भगवान के अनन्य भक्त बने। उन्होंने कहा कि धर्म और भक्ति मनुष्य को हर कठिन परिस्थिति में सही मार्ग दिखाते हैं। इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।उन्होंने ध्रुव जी का उदाहरण देते हुए बताया कि अच्छे संस्कार और दृढ़ भक्ति के कारण मात्र पांच वर्ष की आयु में उन्हें भगवान के दर्शन प्राप्त हुए और दीर्घकाल तक राज्य करने का वरदान मिला। कथा में माता-पिता की सेवा, प्रेम, सदाचार और सामाजिक जिम्मेदारियों को धर्म का मूल आधार बताया गया।कार्यक्रम में संकीर्तन मंडली ने भजन-कीर्तन प्रस्तुत कर भक्तिमय वातावरण बनाया। परीक्षित हरीराम और मुन्नी देवी राठौर ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण करने की अपील की। कथा में नंदगवां, विलहटी, बसैयाहार, नीलदेवता समेत आसपास के कई गांवों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।