
Pardarshi Vikas News Kushinagar
खड्डा तहसील पिछले 6 माह 15 दिनों से बिना “कप्तान” के चल रही है। तहसीलदार का पद खाली पड़ा है और इसका सीधा खामियाजा आम जनता भुगत रही है। प्रशासनिक और न्यायिक कामकाज की रफ्तार ऐसी सुस्त पड़ी है कि फरियादी फाइलों के साथ धक्के खाते नजर आ रहे हैं।
तहसीलदार के अभाव में नायब तहसीलदार पर दोहरी जिम्मेदारी लाद दी गई है, लेकिन सीमित संसाधनों और बढ़ते मामलों के बीच यह व्यवस्था पूरी तरह हांफती दिख रही है। नतीजा—मुकदमों की सुनवाई टल रही है, तारीख पर तारीख मिल रही है और न्याय दूर होता जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि सैकड़ों राजस्व मामले लंबित पड़े हैं—भूमि विवाद, नामांतरण, उत्तराधिकार जैसे जरूरी प्रकरण फाइलों में दबे हैं। फरियादियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। लोगों का कहना है कि “न समय पर सुनवाई, न समाधान—बस चक्कर पर चक्कर।”
स्थिति यह है कि प्रमाण पत्र जारी करने से लेकर दाखिल-खारिज तक के काम प्रभावित हैं। आम जनता के लिए जरूरी सेवाएं ठप जैसी हो गई हैं, जिससे आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव दोनों बढ़ रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस लापरवाही पर सवाल खड़े करते हुए शासन से तत्काल नियुक्ति की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द तहसीलदार नहीं भेजा गया तो हालात और बिगड़ेंगे और जनता का भरोसा पूरी तरह डगमगा जाएगा।
वहीं, एडीएम का कहना है कि शासन को पत्र भेज दिया गया है और “जल्द” तैनाती होगी। लेकिन बड़ा सवाल यही है—आखिर यह “जल्द” कब आएगा? तब तक खड्डा की जनता यूं ही सिस्टम की सुस्ती का खामियाजा भुगतती रहेगी?