
पारदर्शी विकास ब्यूरो
पडरौना/कुशीनगर। पडरौना राजदरबार की भू-संपदा से जुड़े 44 वर्ष पुराने सीलिंग विवाद का आखिरकार निर्णायक अंत हो गया। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी की पैरवी के बाद नियत प्राधिकारी (सीलिंग)/अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) ने 14 अगस्त 2026 को सीलिंग वाद संख्या 462/223 में आदेश पारित किया। इसके तहत 1503.57 एकड़ अतिरिक्त भूमि राज्य सरकार में निहित कर दी गई है। प्रशासन के अनुसार केवल 18.04 एकड़ सिंचित भूमि विधिक उत्तराधिकारियों के उपयोग के लिए छोड़ी गई है। निहित भूमि में पडरौना तहसील की 339.54 एकड़, खड्डा की 1127.43 एकड़, कसया की 10 एकड़ और कप्तानगंज क्षेत्र की 26.60 एकड़ भूमि शामिल है। कुल 92 गांवों की भूमि इस आदेश से प्रभावित हुई है। यह मामला वर्ष 1978 में सीलिंग कार्रवाई से शुरू हुआ था। बाद में अपील और हाईकोर्ट में याचिका के कारण प्रक्रिया लंबे समय तक लंबित रही। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका वर्ष 2002 में ‘डिसमिस्ड इन डिफॉल्ट’ हो गई थी। प्रशासन के अनुसार अब निहित भूमि को राजस्व अभिलेखों और खतौनी में राज्य सरकार/सीलिंग मद में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस भूमि का नियमानुसार उपयोग भूमिहीन और गरीब परिवारों को कृषि व आवासीय पट्टा देने के साथ विद्यालय, अस्पताल, खेल मैदान, आंगनबाड़ी केंद्र और पंचायत भवन जैसी जनकल्याणकारी परियोजनाओं के लिए किया जा सकेगा। प्रशासन ने सीलिंग भूमि पर अवैध कब्जा मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।