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विश्व पालि गौरव दिवस के रूप में मनाई जाएगी अनागरिक धम्मपाल की जयंती

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बौद्ध धम्म के पुनरुत्थान को समर्पित रहा है अनागरिक धम्मपाल का जीवन:आर सी बौद्ध
धम्मपाल जयंती से शुरू होगा 15 दिवसीय पालि पखवाड़ा
राष्ट्रीय जन अभियान बनाने की अपील



संजीव भारती
पारदर्शी विकास न्यूज़  अमेठी/लखनऊ। अनागरिक धम्मपाल की जयंती 17सितम्बर को मनाई जाएगी। विश्व बौद्ध महासंघ की ओर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में  कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।अनागरिक धम्मपाल का जीवन बौद्ध धम्म के पुनरुत्थान, शिक्षा, नैतिकता और भारत में बौद्ध तीर्थ स्थलों के संरक्षण के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने बिहार में स्थित महाबोधि मंदिर को बौद्धो को दिलाने के लिए महाबोधि सोसायटी की स्थापना की और बौद्ध तीर्थ स्थलों के संरक्षण और पुनर्जीवन का आंदोलन चलाया।विश्व बौद्ध संघ के राष्ट्रीय संरक्षक आर सी बौद्ध ने बताया कि बुद्ध की करूणा, नैतिक जीवन,आत्म अनुशासन, शिक्षा,मानव सेवा और बौद्ध विरासत का संरक्षण धम्मपाल के जीवन दर्शन का सार है।उन्होंने बौद्ध धम्म के अनुयायियों और भिक्षु संघ को 17सितम्बर को बौद्ध धम्म ग्रन्थों के अध्ययन और पालि भाषा और बौद्ध साहित्य के विकास के लिए संवाद कार्यक्रमों के आयोजन की अपील की है। देवमित्त अनागारिक धम्मपाल की जयंती के अवसर पर 17 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक देशभर में ‘पालि पखवाड़ा महोत्सव -2026’ का आयोजन किया जाएगा। पखवाड़े का उद्देश्य पालि भाषा एवं साहित्य, त्रिपिटक, बौद्ध संस्कृति तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के साथ इनके संरक्षण एवं संवर्धन को व्यापक सामाजिक अभियान का रूप देना है। 17 सितंबर को धम्मपाल जयंती के अवसर पर ‘विश्व पालि गौरव दिवस’ मनाया जाएगा तथा इसके बाद विभिन्न शैक्षणिक, धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित होगी।केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के बौद्धदर्शन विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रफुल्ल गडपाल ने बताया कि पखवाड़े के दौरान पालि भाषा एवं साहित्य, त्रिपिटक, बौद्ध संस्कृति और भारतीय ज्ञान-परम्परा से संबंधित व्याख्यान, परिचर्चा, संगोष्ठी, पालि-पाठ, विभिन्न प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा जन-जागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों को शैक्षणिक, विहारीय एवं सामाजिक स्तर पर संचालित करने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कार्यक्रमों की श्रृंखला में 17 सितंबर को अनागारिक धम्मपाल के बौद्ध धम्म एवं पालि के लिए योगदान पर व्याख्यान, 18 सितंबर को धम्मलिपि एवं पुरातत्त्व जागरूकता, 19 सितंबर को अखंड धम्मपद संगायन, 20 सितंबर को निबंध-लेखन, पालि गीत एवं सांस्कृतिक गतिविधियां, 22 सितंबर को बाल पालि एवं धम्म कार्यक्रम, 23 सितंबर को प्रतिभा सम्मान तथा 24 सितंबर को पालि त्रिपिटक संगायन पर परिचर्चा सहित विभिन्न आयोजन शामिल हैं।विश्व बौद्ध महासंघ के राष्ट्रीय संरक्षक आर.सी. बौद्ध ने कहा कि पखवाड़े के अंतर्गत भिक्षु संघ, बौद्ध विहारों, पालि विभागों, विद्यालयों-महाविद्यालयों, शैक्षणिक एवं सामाजिक संस्थाओं तथा अन्य उपयुक्त स्थानों पर स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं। इनमें व्याख्यान, पाठ-संगायन, प्रश्नोत्तरी, भाषण, निबंध-लेखन, चित्रकला, पालि गीत-कविता, वादन-नृत्य तथा बौद्ध धम्म सामान्य ज्ञान जैसी प्रतियोगिताओं को भी शामिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पालि केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य, संस्कृति, इतिहास, दर्शन और बौद्ध ज्ञान-परम्परा को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए पालि के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए शैक्षणिक संस्थाओं के साथ-साथ सामाजिक स्तर पर भी व्यापक प्रयास आवश्यक हैं। पखवाड़े की अवधारणा इसी दिशा में जनभागीदारी विकसित करने की है।पालि पखवाड़े की तैयारियों को लेकर आयोजित ऑनलाइन बैठक में जितेन्द्र राम सहित विभिन्न बौद्ध विद्वानों, शिक्षकों और सामाजिक चिंतकों ने सहभागिता की। बैठक में पखवाड़े के कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर संचालित करने तथा अधिकाधिक संस्थाओं और लोगों को इससे जोड़ने पर विचार-विमर्श किया गया।डॉ. प्रफुल्ल गडपाल ने सभी भिक्षु संघों, बौद्ध संस्थाओं, शिक्षकों, छात्र-छात्राओं एवं बौद्ध धम्म के अनुयायियों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पालि पखवाड़े का आयोजन कर इसे राष्ट्रीय जन-अभियान का स्वरूप प्रदान करें। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी के माध्यम से पालि भाषा, त्रिपिटक और बौद्ध ज्ञान-परम्परा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा सकते हैं।