
पारदर्शी विकास न्यूज़। डॉ. बी. के. लोधी के लेख के अनुसार, ब्रिटिश शासन ने कई जुझारू और लड़ाकू समुदायों को अपनी सत्ता के लिए खतरा मानते हुए 1871 के क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत ‘जन्मजात अपराधी’ का कलंक दिया। लेख में अय्यंगार कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि ये समुदाय आदतन अपराधी नहीं, बल्कि औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ संघर्ष करने वाले ‘अनियमित योद्धा’ थे।
लेख में लोधा, किसान, कल्लर, थेवर और मारवार जैसे समुदायों के अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का उल्लेख किया गया है। लेखक का कहना है कि स्वतंत्रता के बाद भी इन समुदायों को उचित संवैधानिक और सामाजिक पहचान नहीं मिल सकी तथा अलग-अलग राज्यों में इनके वर्गीकरण को लेकर विसंगतियां बनी हुई हैं।
लेख में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान का भी उल्लेख किया गया है। लेखक के अनुसार, नेताजी ने इन समुदायों की देशभक्ति और सैन्य कौशल को पहचाना और आजाद हिंद फौज में उनका उपयोग किया। लेख में दावा किया गया है कि मध्य भारत, उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के अनेक जुझारू समुदायों के लोग INA से जुड़े और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं।
लेखक ने इदाते आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने और विमुक्त एवं घुमंतू समुदायों को सम्मान तथा अधिकार दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।