
पारदर्शी विकास न्यूज़ वाराणसी। दशलक्षण पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन ‘उत्तम मार्दव’ धर्म का संदेश दिया गया। इस अवसर पर बताया गया कि धन-दौलत, शान-शौकत और वैभव कई बार मनुष्य के भीतर अहंकार और अभिमान को जन्म देते हैं। व्यक्ति स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ समझने लगता है, जबकि सांसारिक सुख-सुविधाएं और संपत्ति स्थायी नहीं हैं।उत्तम मार्दव धर्म मनुष्य को अहंकार, अभिमान और परिग्रह का त्याग कर विनम्रता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। सभी जीवों के प्रति मैत्रीभाव रखने और उनके जीवन के अधिकार का सम्मान करने का संदेश दिया गया। नाशवान वस्तुओं के पीछे भागने के बजाय आत्मचिंतन और आत्मपहचान की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया गया।तप, त्याग और साधना के माध्यम से मनुष्य अपने भीतर के विकारों पर नियंत्रण पा सकता है। जीवन अस्थायी है, इसलिए अहंकार और परिग्रह छोड़कर विनम्रता, मैत्रीभाव, सदाचार और साधना को अपनाना ही उत्तम मार्दव धर्म का प्रमुख संदेश है।