
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में एम.एड. की दलित छात्रा प्रेमा देवी के साथ कथित जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। छात्रा को न्याय दिलाने की मांग को लेकर भीम आर्मी स्टूडेंट्स फेडरेशन (BASF) के नेतृत्व में छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। आंदोलन में आइसा (AISA) छात्र संगठन ने भी सहयोग किया। प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शनकारियों ने कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा।भीम आर्मी स्टूडेंट्स फेडरेशन के जिला संयोजक हेमंत विद्यार्थी ने कहा कि विश्वविद्यालय में जातिगत भेदभाव और विद्यार्थियों के उत्पीड़न से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले भी शोधार्थियों और विद्यार्थियों के साथ भेदभाव तथा प्रशासनिक उपेक्षा की शिकायतें सामने आती रही हैं। जब छात्र अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय मामलों को दबाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से छात्रा को न्याय दिलाने और शिकायत पर पारदर्शी कार्रवाई करने की मांग की।छात्र नेता सचिन चंद्रा ने आरोप लगाया कि प्रेमा देवी को न्याय दिलाने के मामले में कुलपति की ओर से अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई जा रही है। वहीं, अभिषेक कामरेड ने विश्वविद्यालय में जातिवाद व्याप्त होने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि पीड़िता को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो विश्वविद्यालय परिसर को जंतर-मंतर की तर्ज पर आंदोलन का केंद्र बनाया जाएगा।

छात्रा ने शिक्षकों पर लगाए गंभीर आरोप
छात्रा प्रेमा देवी द्वारा दिए गए शिकायती पत्र के अनुसार, वह एम.एड. सत्र 2024-26 में शिक्षक-शिक्षा विभाग की छात्रा हैं और प्रवेश परीक्षा में अपने वर्ग में चौथे स्थान पर चयनित हुई थीं। उनका आरोप है कि विभागाध्यक्ष डॉ. तनुजा भट्ट ने सार्वजनिक रूप से उनके प्रवेश को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की और कहा कि उन्होंने विनती करके कृपा स्वरूप प्रवेश पाया है। छात्रा ने शिक्षक डॉ. विमल सिंह पर कक्षा में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने और उन्हें निशाना बनाने का आरोप भी लगाया है।शिकायत में फेयरवेल कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक रूप से अपमानित करने, जातिगत टिप्पणियां करने और भविष्य बर्बाद करने की धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। छात्रा का यह भी आरोप है कि विरोध दर्ज कराने के बाद उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पक्षपात किया गया तथा मिड-टर्म परीक्षाओं के दौरान नियमों के विपरीत नाम लिखवाने का दबाव बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. रश्मि गोरे और आंतरिक समिति को शिकायत देने के बावजूद मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई।
निष्पक्ष जांच और शैक्षणिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग
प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि विभागाध्यक्ष डॉ. तनुजा भट्ट के विरुद्ध प्रशासनिक जांच कराई जाए और आरोप सिद्ध होने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए आरोपित शिक्षकों को संबंधित पदों से हटाने तथा स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग भी रखी।इसके अलावा छात्रा की उत्तर पुस्तिकाओं, आंतरिक अंकों और मूल्यांकन अभिलेखों की स्वतंत्र विशेषज्ञों से समीक्षा कराने, जांच के दौरान किसी भी तरह के मानसिक दबाव या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने तथा छात्रा के शैक्षणिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई।भीम आर्मी स्टूडेंट्स फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि प्रेमा देवी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। संगठन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच और समयबद्ध कार्रवाई करने की मांग की। प्रदर्शन में सचिन चंद्रा, अभिषेक, कार्तिक, स्वर्णकांत, राजेश, अमरकांत, रिया, नीलम, आशा, सविता और गोविंद सहित अन्य छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
अब विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर निगाहें टिकी हैं।
छात्र संगठनों ने जहां निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग उठाई है, वहीं आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए शिकायत की पारदर्शी जांच कराना और छात्रा के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।