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संघ किसी का विरोधी नहीं: सह प्रचार प्रमुख

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समाज में शिक्षा, सुरक्षा और विकास के लिए काम करता है RSS

pardarshi news kanpur 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, कानपुर प्रांत द्वारा बेनाझाबर में मीडिया संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेन्द्र ठाकुर ने कहा कि संघ अपने शताब्दी वर्ष में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। यह क्रम विजयादशमी 2025 से शुरू हुआ, जिसके तहत पथ संचलन, गृह संपर्क अभियान और हिंदू सम्मेलन पूरे देश में आयोजित किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी। उस समय देश स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रहा था और यह विचार सामने आया कि स्वतंत्रता को स्थायी बनाने के लिए समाज को संगठित और देशभक्त बनाना आवश्यक है। संघ का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण करना है।संघ के कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वर्तमान में देशभर के 55 हजार से अधिक स्थानों पर करीब 89 हजार शाखाएं संचालित हो रही हैं, जबकि 23 हजार स्थानों पर 32 हजार से अधिक मिलन कार्यक्रम चल रहे हैं। इसके अलावा देश में लगभग 1.70 लाख सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं।शताब्दी वर्ष में संघ ने पांच प्रमुख विषयों पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है, जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी आधारित जीवनशैली और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता शामिल हैं। उन्होंने कहा कि समाज में एकजुटता और समरसता बनाए रखना समय की आवश्यकता है।मीडिया से संवाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि संघ लगातार मीडिया के साथ संपर्क बढ़ा रहा है। युवाओं की भागीदारी पर उन्होंने बताया कि हर वर्ष हजारों युवा संगठन से जुड़ रहे हैं। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी विभिन्न सहयोगी संगठनों के माध्यम से कार्य किया जा रहा है।कार्यक्रम में संघ के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

शताब्दी के बाद ‘पंच परिवर्तन’ अभियान

  1. सामाजिक समरसता: जाति-धर्म से ऊपर उठकर एकता का संदेश, मंदिर, श्मशान और जलस्रोत सभी के लिए समान रूप से खुले रखने का प्रयास।
  2. कुटुंब प्रबोधन: परिवार व्यवस्था को मजबूत करना, संस्कार और मूल्यों के संरक्षण पर जोर।
  3. पर्यावरण संरक्षण: पेड़ लगाना, जल संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त जीवन शैली को बढ़ावा देना।
  4. स्वाधारित जीवन शैली: स्वदेशी, स्वराज और स्वभाषा को अपनाने के लिए प्रेरित करना।
  5. नागरिक कर्तव्य: लोगों को अपने दायित्वों के प्रति जागरूक कर देश के विकास में भागीदारी सुनिश्चित करना।