
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) और नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) ने शहर में योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त रूप से ‘योग पखवाड़ा’ शुरू किया है। तात्या टोपे सभागार में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए योग और आयुर्वेद की परंपरा को अपनाना जरूरी है। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक विकास का माध्यम है। उन्होंने विश्वविद्यालय में संचालित बीएससी, एमएससी और पीजी डिप्लोमा योग पाठ्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कोर्स युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं।योग सिर्फ शरीर को हिलाने-डुलाने का नाम नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत को जोड़ने का माध्यम है। इससे एकाग्रता बढ़ती है और जीवन जीने का दृष्टिकोण बदलता है।इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ रखी गई है। प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने कहा कि नियमित योग से बढ़ती उम्र के प्रभाव को धीमा किया जा सकता है। आयुर्वेद अधिकारी डॉ. कप्तान सिंह ने बताया कि सही आहार और योग को दिनचर्या में शामिल करने से कई बीमारियों से बचाव संभव है।कार्यक्रम में डॉ. वंदना पाठक ने भोजन और मानसिक स्थिति के संबंध पर प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि शांत मन से भोजन करने और सकारात्मक भाव रखने से स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।योग पखवाड़े के समन्वयक डॉ. रामकिशोर ने बताया कि विश्वविद्यालय के योग पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया जारी है और सीटें ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर दी जा रही हैं। उद्घाटन सत्र के बाद ईशा फाउंडेशन की टीम ने ध्यान और मेडिटेशन का प्रशिक्षण भी दिया।