
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले के द्वितीय चरण के अंतर्गत निराला नगर स्थित राज मेमोरियल पब्लिक स्कूल में कन्या वंदन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं को देवी स्वरूप मानकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को नारी सम्मान, भारतीय संस्कृति, सेवा भाव और सामाजिक समरसता का संदेश दिया गया।कार्यक्रम में हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले के दक्षिण संयोजक सुशील कुमार के साथ पीयूष अग्निहोत्री एवं पीयूष मिश्रा उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों को मेले के उद्देश्यों, उसकी गतिविधियों तथा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के महत्व की जानकारी दी। इस अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक दिवाकर प्रजापति भी मौजूद रहे।

कन्या वंदन कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्रों ने छात्राओं के चरण धोकर, तिलक लगाकर और चुनरी पहनाकर उनका पूजन किया। इसके बाद छात्राओं को प्रसाद स्वरूप केले वितरित किए गए। पूरे आयोजन में बालिकाओं के प्रति सम्मान और आदर की भावना को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को बताया गया कि भारतीय संस्कृति में नारी को विशेष स्थान दिया गया है और बालिकाओं का सम्मान करना प्रत्येक व्यक्ति का सामाजिक एवं नैतिक दायित्व है।इस दौरान हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले के दक्षिण संयोजक सुशील कुमार और उनके साथियों ने विद्यार्थियों को बताया कि कानपुर के बृजेंद्र स्वरूप पार्क में 26 से 30 नवंबर तक हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों, सेवा भावना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। मेले के माध्यम से विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियों के जरिए लोगों को सेवा कार्यों से जोड़ने और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।

आयोजकों ने विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों से मेले में सहभागिता करने तथा इसके उद्देश्यों एवं संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बच्चों में बचपन से ही सेवा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना आवश्यक है। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं से जोड़ने के साथ ही समाज में नारी सम्मान और समानता के मूल्यों को मजबूत करते हैं।राज पब्लिक स्कूल में आयोजित कन्या वंदन कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि संस्कृति और संस्कार केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और जीवन में अपनाना भी जरूरी है। कार्यक्रम ने बालिकाओं के सम्मान, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक जागरूकता को प्रोत्साहित करने की दिशा में सार्थक पहल की।
