
दिव्यांग बच्चों के पुनर्वास में तीन दशक से समर्पित डॉ. नरेंद्र कुमार पांडे
पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। विश्व सेरेब्रल पाल्सी दिवस के अवसर पर पारदर्शी विकास न्यूज़ के विशेष कार्यक्रम ‘पारदर्शी चर्चा’ में दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास और सेरेब्रल पाल्सी को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा हुई। कार्यक्रम में दीपिका चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर के संस्थापक एवं कानपुर फिजियोथैरेपिस्ट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश से जुड़े डॉ. नरेंद्र कुमार पांडे ने सेरेब्रल पाल्सी से प्रभावित बच्चों की समस्याओं, समय पर पहचान, आधुनिक पुनर्वास और परिवार की भूमिका पर जानकारी साझा की।डॉ. पांडे ने बताया कि सेरेब्रल पाल्सी बचपन में होने वाली न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जिसका प्रभाव बच्चे की गतिविधियों, शरीर की मुद्रा, संतुलन और समन्वय पर पड़ सकता है। कुछ बच्चों में मांसपेशियों में जकड़न, अनैच्छिक गतिविधियां, चलने-फिरने में कठिनाई, बोलने या निगलने में परेशानी तथा अन्य विकासात्मक समस्याएं भी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों के विकासात्मक पड़ावों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गर्दन संभालने, बैठने, खड़े होने, चलने, हाथों का उपयोग करने या बोलने में देरी दिखाई देने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।चर्चा के दौरान बताया गया कि सेरेब्रल पाल्सी के पुनर्वास में बच्चे की जरूरत के अनुसार फिजियोथैरेपी, ऑक्यूपेशनल थैरेपी, स्पीच एंड लैंग्वेज थैरेपी, विशेष शिक्षा, बैलेंस एवं गैट ट्रेनिंग, स्ट्रेचिंग, पोजिशनिंग और फंक्शनल ट्रेनिंग जैसी सेवाओं का समन्वित उपयोग किया जा सकता है। आधुनिक पुनर्वास का उद्देश्य केवल बच्चे को चलाना नहीं, बल्कि उसकी कार्यात्मक स्वतंत्रता, संचार, गतिशीलता, स्वयं की देखभाल और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है।डॉ. नरेंद्र कुमार पांडे ने कहा कि हर बच्चा अलग होता है, इसलिए उसकी पुनर्वास रणनीति भी उसकी क्षमता और जरूरत के अनुसार तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने परिवार की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि माता-पिता और देखभाल करने वालों को घर पर सही अभ्यास, पोजिशनिंग और दैनिक गतिविधियों में बच्चे को अधिक स्वतंत्र बनाने के तरीकों की जानकारी होनी चाहिए। नियमित फॉलोअप और घर पर अभ्यास पुनर्वास प्रक्रिया में सहायक हो सकता है।उन्होंने बताया कि पिछले लगभग 30 वर्षों से दिव्यांग एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है। कानपुर में दीपिका फिजियोथैरेपी एंड चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर की तीन शाखाओं के माध्यम से सेरेब्रल पाल्सी, ऑटिज्म, डेवलपमेंटल डिले और डाउन सिंड्रोम सहित विभिन्न समस्याओं से प्रभावित बच्चों को बहुआयामी पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कार्यक्रम में अभिभावकों से समय पर पहचान, विशेषज्ञ की सलाह और नियमित पुनर्वास को प्राथमिकता देने की अपील की गई।
दिव्यांगों के लिए निरामया स्वास्थ्य बीमा योजना महत्वपूर्ण सहारा
दिव्यांग व्यक्तियों और उनके परिवारों के लिए नेशनल ट्रस्ट की निरामया हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा योजना है। योजना के तहत पात्र दिव्यांग व्यक्तियों को एक लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवर उपलब्ध है। इसके अंतर्गत पात्रता के अनुसार ओपीडी उपचार, दवाएं, पैथोलॉजी एवं डायग्नोस्टिक जांच, अस्पताल में भर्ती, सुधारात्मक सर्जरी, नियमित थैरेपी, आयुष उपचार और परिवहन खर्च के लिए निर्धारित सीमा में सहायता मिल सकती है।योजना के लाभों में अस्पताल में भर्ती के लिए 55 हजार रुपये तक, ओपीडी के लिए 19 हजार रुपये तक और नियमित थैरेपी के लिए 20 हजार रुपये तक का प्रावधान बताया गया है। आयुष के लिए चार हजार और परिवहन के लिए दो हजार रुपये तक की सीमा निर्धारित है। नियमित थैरेपी के खर्च के लिए चिकित्सकीय पर्चे और संबंधित दस्तावेज आवश्यक होते हैं।पात्र दिव्यांग व्यक्ति वैध दिव्यांगता प्रमाणपत्र के साथ यूडीआईडी कार्ड या पात्र यूडीआईडी नामांकन संख्या के आधार पर योजना में शामिल हो सकते हैं। डॉ. नरेंद्र कुमार पांडे ने अभिभावकों से प्रमाणपत्र, यूडीआईडी, मेडिकल रिकॉर्ड और पुनर्वास संबंधी दस्तावेज सुरक्षित रखने तथा पात्रता के अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की अपील की।