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कम उम्र में बाल झड़ना क्यों हो रहा है? जानिए कारण और सही इलाज

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वैद्य राज कुमार शुक्ला
पारदर्शी विकास न्यूज़


आज के समय में कम उम्र में बाल झड़ने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां बाल झड़ना बढ़ती उम्र की निशानी माना जाता था, वहीं अब 18 से 30 वर्ष के युवाओं में भी यह समस्या आम होती जा रही है। कॉलेज जाने वाले छात्र, नौकरीपेशा युवा और यहां तक कि किशोर भी बालों के लगातार झड़ने से परेशान हैं। बाल केवल चेहरे की सुंदरता ही नहीं बढ़ाते, बल्कि आत्मविश्वास और व्यक्तित्व का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ऐसे में कम उम्र में बाल झड़ना मानसिक तनाव, आत्मविश्वास में कमी और कई बार सामाजिक असहजता का कारण बन जाता है। हालांकि यह समस्या गंभीर जरूर है, लेकिन समय रहते सही कारण की पहचान कर उचित उपचार अपनाया जाए तो अधिकांश मामलों में इसे नियंत्रित किया जा सकता है। कम उम्र में बाल झड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण आज की बदलती जीवनशैली है। अनियमित दिनचर्या, देर रात तक जागना, पर्याप्त नींद न लेना, फास्ट फूड और जंक फूड का अधिक सेवन, शारीरिक गतिविधियों की कमी तथा लगातार तनाव बालों की जड़ों को कमजोर बना देते हैं। शरीर को स्वस्थ बालों के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, आयरन, जिंक, विटामिन डी, विटामिन बी12, बायोटिन और अन्य पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जब भोजन संतुलित नहीं होता, तब शरीर सबसे पहले उन हिस्सों पर असर दिखाता है जो जीवन के लिए आवश्यक नहीं माने जाते, जिनमें बाल भी शामिल हैं। परिणामस्वरूप बाल पतले होने लगते हैं और धीरे-धीरे झड़ने लगते हैं। तनाव भी बाल झड़ने का एक बड़ा कारण है। पढ़ाई का दबाव, नौकरी की चिंता, पारिवारिक समस्याएं और भविष्य को लेकर लगातार तनाव शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित करता है। तनाव की स्थिति में बालों की वृद्धि का सामान्य चक्र बाधित हो जाता है और अधिक संख्या में बाल एक साथ झड़ने लगते हैं। कई बार यह समस्या कुछ महीनों तक बनी रहती है और व्यक्ति को लगता है कि वह तेजी से गंजा हो रहा है। आनुवंशिक कारण भी कम उम्र में बाल झड़ने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। यदि परिवार में माता-पिता या दादा-दादी को कम उम्र में गंजेपन की समस्या रही है, तो अगली पीढ़ी में भी इसका खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में केवल घरेलू उपायों से पूरी तरह लाभ मिलना मुश्किल हो सकता है और विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। महिलाओं में हार्मोनल बदलाव भी बाल झड़ने का प्रमुख कारण बनते हैं। थायरॉयड की बीमारी, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस), गर्भावस्था के बाद होने वाले हार्मोनल परिवर्तन तथा शरीर में आयरन की कमी के कारण बाल तेजी से झड़ सकते हैं। पुरुषों में भी हार्मोन संबंधी बदलाव बालों के पतले होने और गंजेपन का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा डेंगू, टाइफाइड, कोविड-19 जैसे संक्रमणों के बाद भी कई लोगों में कुछ महीनों तक बाल झड़ने की समस्या देखी जाती है। आजकल बालों को स्टाइलिश बनाने के लिए तरह-तरह के रासायनिक उत्पादों का उपयोग किया जाता है। बार-बार हेयर कलर, स्ट्रेटनिंग, स्मूदनिंग, रीबॉन्डिंग, अधिक गर्म ड्रायर और हेयर स्प्रे का उपयोग बालों की प्राकृतिक मजबूती को नुकसान पहुंचाता है। इसके साथ ही प्रदूषण, धूल और धूप भी बालों की जड़ों पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। यदि स्कैल्प की सफाई सही तरीके से न की जाए तो रूसी और संक्रमण की समस्या बढ़ जाती है, जिससे बाल झड़ना और तेज हो सकता है। बाल झड़ने से बचने के लिए सबसे पहले अपनी जीवनशैली में सुधार करना आवश्यक है। संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, रोजाना कम से कम सात से आठ घंटे की नींद लेना और नियमित व्यायाम करना बालों के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। भोजन में दालें, दूध, दही, पनीर, अंडा, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, सूखे मेवे और अंकुरित अनाज शामिल करने चाहिए। ये सभी पोषक तत्व बालों की जड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान और प्राणायाम का अभ्यास लाभदायक माना जाता है। साथ ही धूम्रपान और शराब जैसी आदतों से दूरी बनाना भी जरूरी है, क्योंकि ये शरीर में रक्त संचार को प्रभावित करती हैं और बालों की जड़ों तक पर्याप्त पोषण नहीं पहुंचने देतीं। बालों को बहुत कसकर बांधने, गीले बालों में कंघी करने और अत्यधिक गर्म पानी से सिर धोने से भी बचना चाहिए। घरेलू उपायों की बात करें तो नारियल तेल, आंवला, भृंगराज और एलोवेरा का उपयोग लंबे समय से बालों की देखभाल में किया जाता रहा है। नियमित रूप से हल्की तेल मालिश करने से स्कैल्प में रक्त संचार बेहतर हो सकता है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि यदि बाल झड़ने का कारण हार्मोनल समस्या, पोषण की गंभीर कमी या आनुवंशिक गंजापन है, तो केवल घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होते। यदि बाल लगातार झड़ रहे हों, सिर की मांग चौड़ी होती जा रही हो, बाल तेजी से पतले हो रहे हों या सिर पर गंजे पैच बनने लगे हों, तो बिना देर किए त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। डॉक्टर आवश्यकता पड़ने पर खून की जांच कर पोषण की कमी, थायरॉयड या अन्य कारणों का पता लगाते हैं। इसके बाद स्थिति के अनुसार उपचार शुरू किया जाता है। कुछ मामलों में मिनॉक्सिडिल जैसे बाहरी उपचार, कुछ विशेष दवाएं, पीआरपी थेरेपी या अन्य आधुनिक उपचारों की सलाह दी जाती है। गंभीर गंजेपन की स्थिति में हेयर ट्रांसप्लांट भी एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसका निर्णय केवल विशेषज्ञ की सलाह से ही लेना चाहिए। यह भी याद रखना चाहिए कि इंटरनेट या सोशल मीडिया पर बताए जाने वाले हर नुस्खे पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। कई तथाकथित चमत्कारी तेल, दवाएं और सप्लीमेंट बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाण के बेचे जाते हैं और कई बार इनसे लाभ के बजाय नुकसान हो सकता है। इसलिए किसी भी दवा या उपचार को शुरू करने से पहले योग्य डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है। कम उम्र में बाल झड़ना आज की तेज रफ्तार जिंदगी की एक बड़ी चुनौती बन चुका है, लेकिन यह ऐसी समस्या नहीं है जिसका समाधान संभव न हो। सही खान-पान, नियमित दिनचर्या, तनाव पर नियंत्रण, बालों की उचित देखभाल और समय पर चिकित्सकीय सलाह से अधिकांश लोग अपने बालों को स्वस्थ रख सकते हैं। बालों की समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय शुरुआती चरण में ही उचित कदम उठाना भविष्य में होने वाले बड़े नुकसान से बचा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली ही मजबूत, घने और सुंदर बालों की सबसे मजबूत नींव है।