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‘कच्चा बादाम’ बजते ही भड़कीं अंजलि अरोड़ा, 12 मिनट में छोड़ा मंच!

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तीन घंटे इंतजार करते रहे दर्शक, डांडिया नाइट के इंतजामों पर उठे सवाल

 

 

पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। सोशल मीडिया पर ‘कच्चा बादाम’ गाने से सुर्खियों में आईं अंजलि अरोड़ा गुरुवार रात कानपुर के मोती झील स्थित लाजपत भवन में आयोजित नगाड़ा नाइट डांडिया कार्यक्रम में नाराज हो गईं। जिस गाने से उन्हें पहचान मिली, उसी के बजते ही उन्होंने डांस रोक दिया और आयोजकों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने लगीं। हालात ऐसे बने कि हजारों दर्शकों के बीच पहुंचीं अंजलि करीब 12 मिनट मंच पर रुकने के बाद कार्यक्रम छोड़कर चली गईं। इस घटनाक्रम ने आयोजन की तैयारियों और कलाकारों के सम्मान को लेकर चर्चा छेड़ दी।15 अक्टूबर को आयोजित कार्यक्रम शाम 7:30 बजे शुरू हुआ। अंजलि अरोड़ा को देखने के लिए दर्शक घंटों इंतजार करते रहे। रात करीब 9:52 बजे वह मंच पर पहुंचीं। शुरुआत में उन्होंने कानपुर के लोगों से बातचीत की और ‘नगाड़ा संग ढोल बाजे’ गाने पर दर्शकों के साथ डांस किया। लेकिन कुछ ही देर बाद व्यवस्थाओं को लेकर उनकी नाराजगी सामने आने लगी।एक पंजाबी गाने के दौरान उन्होंने माइक संभालते हुए कहा कि यहां दर्शकों को ठीक से देखा तक नहीं जा रहा है। उन्होंने भीड़ में एक दर्शक को चोट लगने का जिक्र करते हुए उसका ध्यान रखने की अपील की। इसके बाद उन्होंने दोबारा डांस शुरू किया, लेकिन तभी डीजे पर ‘कच्चा बादाम’ गाना बज उठा। गाना सुनते ही अंजलि ने डांस रोक दिया और डीजे की तरफ बढ़ गईं।उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, “क्या आर्टिस्ट की रिस्पेक्ट करनी नहीं आती है? बुलाइए ऑर्गनाइजर को। कहां है मैनेजमेंट?” इसके बाद उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था रही तो कानपुर में कोई कलाकार नहीं आएगा। अंजलि ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से माफी भी मांगी और कहा कि वह अब यहां नहीं रुक सकतीं। उन्होंने गर्मी में घंटों से इंतजार कर रहे दर्शकों का हवाला देते हुए व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए।

कार्यक्रम के दौरान मोमेंटो देने को लेकर भी अंजलि नाराज नजर आईं। उन्होंने मंच से कहा, “मैं क्या मोमेंटो दूं, मैं कोई मोमेंटो नहीं दे रही।” इसके बाद उन्होंने दर्शकों की तरफ सेल्फी ली और मंच छोड़कर चली गईं। उनके अचानक जाने से वहां मौजूद लोग हैरान रह गए।दर्शक अनुराग गुप्ता ने बताया कि वे शाम सात बजे से अंजलि का इंतजार कर रहे थे। करीब तीन घंटे इंतजार करने के बाद वह मंच पर आईं और कुछ ही मिनटों में चली गईं। ऐसे में दर्शकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।सवाल यही है कि कलाकार के स्वागत के लिए भव्य आयोजन करने वाले आयोजक क्या दर्शकों की सुरक्षा, सुविधा और कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीरता से निभा पाए? एक तरफ कलाकार ने व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई, तो दूसरी तरफ घंटों इंतजार करने वाले दर्शकों को निराशा हाथ लगी। आखिर डांडिया की रात में मनोरंजन से ज्यादा चर्चा नाराजगी और बदइंतजामी की क्यों होने लगी?