news-details

जाजमऊ पुराना गंगापुल 90 दिन बंद, भारी वाहनों का डायवर्जन लागू; 600 से ज्यादा बसों का बदलेगा रास्ता

You can share this post!

 

पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। जाजमऊ पुराने गंगापुल की मरम्मत और स्पैन के बेयरिंग बदलने के लिए एनएचएआई ने पुल को करीब तीन महीने के लिए बंद कर दिया है। रविवार दोपहर 12 बजे से भारी वाहनों के लिए डायवर्जन लागू कर दिया गया। यह व्यवस्था 13 दिसंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। रोडवेज बसों समेत भारी वाहनों को पुराने गंगापुल से गुजरने की अनुमति नहीं होगी, जबकि छोटे वाहनों को फिलहाल आवागमन की अनुमति दी गई है।उन्नाव की ओर गगनखेड़ा, आजाद मार्ग और त्रिभुवन खेड़ा चौराहों पर बैरिकेडिंग कर डायवर्जन लागू किया गया है। लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली की ओर से कानपुर आने वाली 600 से अधिक रोडवेज बसों का मार्ग बदलेगा। अधिकारियों के मुताबिक भारी यातायात के कारण डायवर्जन व्यवस्था लागू करने में अतिरिक्त समय लगा।उन्नाव से औरैया-इटावा जाने वाले भारी वाहनों को गंगा एक्सप्रेस-वे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का रास्ता अपनाना होगा। वैकल्पिक रूप से बक्सर मोड़ से कानपुर होकर आगे जाने की व्यवस्था रहेगी। बांदा-महोबा जाने वाले वाहन एनएच-31 से लालगंज और फतेहपुर होकर जाएंगे। हमीरपुर, झांसी और उरई के लिए बक्सर मोड़ से एनएच-19, चौड़गरा और एसएच-46 होते हुए घाटमपुर तथा एनएच-34 का रास्ता अपनाना होगा।उन्नाव से कानपुर आने वाले भारी वाहनों को भी एनएच-31 से बक्सर मोड़ होकर कानपुर पहुंचना होगा। डायवर्जन के कारण वैकल्पिक मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने की आशंका है। एनएचएआई स्थिति पर नजर रखेगा और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक प्लान लागू किया जा सकता है।रोडवेज बसों का सफर भी लंबा होगा। वैकल्पिक मार्ग के कारण कानपुर पहुंचने की दूरी करीब 60 से 80 किलोमीटर तक बढ़ने और लगभग डेढ़ घंटे का अतिरिक्त समय लगने की बात सामने आई है। फिलहाल बस किराया बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया गया है।पुराने गंगापुल की हालत लंबे समय से चिंता का विषय बनी हुई थी। पुल की सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं। कई स्थानों पर गड्ढों से आधा फीट से एक फीट तक सरिया बाहर निकल आई है, जिससे वाहनों के टायर फटने और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कानपुर की तरफ पुल खत्म होने के बाद भी करीब 6 से 7 मीटर लंबा गड्ढा बताया जा रहा है, जिसमें बारिश के दौरान पानी भर जाता है।पुल का फुटपाथ भी कई जगह टूट चुका है। क्षतिग्रस्त हिस्सों में लगाए गए पत्थरों के बीच खाली जगह होने से पैदल चलने वालों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बना हुआ है। कई स्थानों पर सुरक्षा रेलिंग भी क्षतिग्रस्त है।भारी वाहनों के गुजरने पर पुल में कंपन महसूस होने की शिकायत भी राहगीरों ने की है। वहीं पुल से जुड़े जीपीएस और टेलीफोन के करीब आधा दर्जन तार गंगा में पड़े होने की बात भी सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक ये तार लंबे समय से इसी स्थिति में हैं।गंगापुल के आगे जाजमऊ-रामादेवी फ्लाईओवर की सड़क भी जगह-जगह गड्ढों से जूझ रही है। बारिश के बाद सड़क की ऊपरी परत उखड़ने से बजरी फैल गई है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के लिए फिसलने का खतरा बढ़ गया है।एनएचएआई के इंजीनियर राजकमल के मुताबिक पुल की पोक लेयर कमजोर होने के कारण कंक्रीट और डामर का मिश्रण टिक नहीं पा रहा है। बारिश में मैटेरियल बहने से सड़क बार-बार खराब हो रही है।अब मरम्मत के लिए पुल बंद होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती वैकल्पिक मार्गों पर बढ़ने वाला यातायात है। 90 दिन की यह बंदी सिर्फ पुल की मरम्मत नहीं, बल्कि कानपुर-उन्नाव के बीच यातायात व्यवस्था की भी बड़ी परीक्षा होगी।

 


पुराने गंगापुल की मरम्मत के लिए उन्नाव प्रशासन के साथ मिलकर गगनखेड़ा, आजाद मार्ग और त्रिभुवन खेड़ा चौराहों पर बैरिकेडिंग का काम शुरू कर दिया गया है। हाईवे पर भारी यातायात होने के कारण डायवर्जन लागू करने में अतिरिक्त समय लग रहा है। तीन दिनों तक बड़े वाहनों पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा, जबकि छोटे वाहनों को आवागमन की अनुमति होगी।-एनएचएआई के डायरेक्टर पंकज यादव 
 

 

60 किलोमीटर बढ़ जाएगी रोडवेज बस की दूरी
पुराने जाजमऊ गंगा पुल की मरम्मत के कारण भारी वाहनों पर रोक लगने से रोडवेज बस से कानपुर की दूरी में 60 किलोमीटर की बढ़ोतरी हो जाएगी। अब बसों को कानपुर पहुंचने में 80 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना होगा। उन्नाव से कानपुर जाने वाली बसों को बिहार बक्सर मार्ग से चौडगरा होकर जाना पड़ेगा। यह दूरी तय करने में करीब डेढ़ घंटे का अतिरिक्त समय लगेगा।