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हंसी-व्यंग्य और शायरी से सजी महफिल, देर रात तक गूंजती रहीं तालियां

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जश्न-ए-मौजशाही में कविता, शायरी और आध्यात्मिक भावों ने बांधा समां

पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। माई साहिब के मार्गदर्शन में साहब जी की स्मृति में साहब स्मृति फाउंडेशन के तत्वावधान में जश्न-ए-मौजशाही का वार्षिक राष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा आईएमए हॉल, परेड, कानपुर में आयोजित किया गया। देर रात तक चले आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हास्य, व्यंग्य, गीत, गजल और आध्यात्मिक भावों से सजी प्रस्तुतियों पर सभागार तालियों से गूंजता रहा।इस वर्ष कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण उज्जैन के महाकालेश्वर से पधारे महेंद्र मधुर जी रहे। उन्होंने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। उनकी कविता “ना राजा याद रहता है, ना रानी याद रहती है” ने जीवन की नश्वरता और समय के बदलाव को रेखांकित किया। इसके साथ ही उन्होंने भगवान श्रीराम और माता सीता की पुष्प वाटिका का सुंदर काव्यात्मक वर्णन प्रस्तुत किया। राम-सीता के प्रथम मिलन और पुष्प वाटिका के मनोहारी वातावरण का वर्णन श्रोताओं को भावविभोर कर गया।कार्यक्रम में राजा यादव ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया, जबकि डॉ. नुसरत मेहंदी ने गजल प्रस्तुत कर माहौल को भावपूर्ण बनाया। हसरत सफीपुरी ने सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाएं प्रस्तुत कीं। नाज प्रतापगढ़ी और मनीष शुक्ला ने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से खूब तालियां बटोरीं। अतीक फतेहपुरी, अलका मिश्रा, अतहर शकील नगीनवी, लोकेश शुक्ल, नुसरत अतीक गोरखपुरी और प्रदीप श्रीवास्तव ‘दैनिक कानपुरी’ ने भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बनाया।कार्यक्रम में संगीता चौहान, के.के. बाजपेयी, सुशील कुमार, मनीष रंजन त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। डॉ. अनुजम मेहरोत्रा मुख्य अतिथि रहे। अध्यक्षता डॉ. इरा मिश्रा ‘माई साहिबा’ ने की, जबकि संचालन प्रो. डॉ. नैय्यर जलालपुरी ने किया।आयोजकों ने बताया कि जश्न-ए-मौजशाही का उद्देश्य साहित्य, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के माध्यम से समाज को जोड़ना तथा साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाना है। देर रात तक चले कवि सम्मेलन में श्रोताओं ने कवियों और शायरों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया।