
हमें यूज एंड थ्रो कल्यर से यूज एंड ग्रो कल्चर की ओर बढ़ना होगा"
पारदर्शी विकास न्यूज़ वाराणसी । यदि हम वास्तव में माँ गंगा से प्रेम करते हैं, तो केवल पूजा-अर्चना पर्याप्त नहीं है। हमें उनके अस्तित्व की रक्षा हेतु ठोस संकल्प लेने होंगे। गंगा को स्वच्छ रखना केवल सरकारों का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का आध्यात्मिक और नैतिक उत्तरदायित्व है। गंगा सेवकों का तीर्थ यात्रियों एवं श्रद्धालुओं से निवेदन है कि वे तीर्थ स्थलों से सुनहरी यादों के साथ अपना कचरा भी साथ लेकर जाएँ। उन्होंने कहा, यदि हम अपने तीर्थों की दिव्यता को बनाये रखना चाहते हैं, तो हमें अपने व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा। प्लास्टिक, कचरा और प्रदूषण तीर्थों की पवित्रता को नष्ट कर रहे हैं। आने वाली पीढ़ियों को भी वही निर्मल और दिव्य गंगा प्राप्त हो, इसके लिये आज हमें जागरूक बनना होगा। हमें यूज एंड थ्रो कल्यर से यूज एंड ग्रो कल्चर की ओर बढ़ना होगा। मां गंगा भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं।गंगा केवल भारत की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व की आध्यात्मिक धरोहर हैं। आज जब पूरी दुनिया पर्यावरण संकट, जल संकठट और मानसिक अशांति से जूझ रही है, तब माँ गंगा का संदेश हमें प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है। गंगाजी हमें संदेश देती है कि जीवन निरंतर बहते रहने का नाम है। हमें अपने भीतर की नकारात्मकता, क्रोध, अहंकार और तनाव को बहाकर प्रेम, शांति और सेवा के भाव को अपनाना चाहिए ।।