
पारदर्शी विकास ब्यूरो / कुशीनगर। जनसुराज पार्टी के डिजिटल कम्युनिकेशन मैनेजर देवपालिक गुप्ता का गुरुवार सुबह कुशीनगर में अंतिम संस्कार किया गया। 31 वर्षीय देवपालिक का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव गोड़रिया के पास मलाही घाट पर हुआ। बड़े भाई तारकेश्वर गुप्ता ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार में जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर भी शामिल हुए। देवपालिक की मौत से परिवार में कोहराम मचा है, वहीं पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।प्रशांत किशोर गुरुवार सुबह करीब सात बजे पार्टी के वरिष्ठ साथियों के साथ देवपालिक के गोड़रिया स्थित आवास पहुंचे। वह लगभग दो घंटे तक परिवार के बीच रहे और शव यात्रा में शामिल होकर श्मशान घाट तक गए। अंतिम संस्कार पूरा होने तक वह वहीं मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना जताई।अंतिम संस्कार के बाद प्रशांत किशोर ने कहा कि देवपालिक पिछले चार वर्षों से उनके साथ काम कर रहे थे। एक दुर्घटना में उनकी दुखद मौत हो गई। वह अपने सहयोगी के अंतिम संस्कार में शामिल होने और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने आए थे।देवपालिक गुप्ता 26 अक्टूबर की रात झारखंड के मुरी क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के किनारे मृत मिले थे। जानकारी के मुताबिक, वह सोमवार को दो दोस्तों के साथ जनशताब्दी एक्सप्रेस (12366) से रांची से पटना जा रहे थे। इसी दौरान वह अपनी बर्थ से पैंट्री से खाना लेने की बात कहकर निकले, लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटे। दोस्तों ने उनके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद मिला।इसके बाद दोस्तों ने मुरी स्टेशन पर उतरकर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तलाश शुरू की और खोजबीन के दौरान रेलवे ट्रैक के किनारे उनका शव बरामद हुआ। हालांकि, वह ट्रेन से किन परिस्थितियों में लापता हुए और उनकी मौत कैसे हुई, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।देवपालिक के बड़े भाई तारकेश्वर गुप्ता ने अपने भाई की मौत को लेकर हत्या की आशंका जताई है। उनका कहना है कि देवपालिक के ट्रेन से निकलने के बाद घटनाक्रम संदिग्ध है। उन्होंने बताया कि बाद में दो लड़के गए और लौटते समय दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए। हालांकि, इन परिस्थितियों के आधार पर मौत को हत्या मानने की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।तारकेश्वर के मुताबिक, फॉरेंसिक टीम ने भी शव जिस स्थिति में मिला, उसे लेकर कुछ सवाल बताए थे। उनके अनुसार, शव की स्थिति सामान्य रूप से गिरने जैसी नहीं लग रही थी। परिवार इस मामले की निष्पक्ष जांच चाहता है।उन्होंने बताया कि प्रशांत किशोर और उनकी टीम ने रांची में परिवार की मदद की। पार्टी के वरिष्ठ अधिकारी लगातार संपर्क में रहे। तारकेश्वर ने यह भी कहा कि देवपालिक ने 30 अगस्त को ही अपना इस्तीफा दे दिया था और वह 24 अक्टूबर तक नोटिस पीरियड पर थे। कुछ दिन आराम करने के बाद उनकी उत्तर प्रदेश में काम करने की योजना थी। उनके अनुसार, मामले में सीबीआई जांच को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से बातचीत की जानकारी भी उन्हें दी गई है।