
पीपल के पेड़ पर धागा बांधने और दीपक जलाने से मनोकामना पूरी होने की मान्यता, सुरक्षा के लिए पुलिस मुस्तैद
वेद प्रकाश/ललित कुमार
अमेठी। नवरात्रि पर्व पर नगर स्थित ऐतिहासिक देवी पाटन मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मंदिर परिसर और आसपास मेले जैसा माहौल बना हुआ है। दर्शन-पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर के आसपास आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। वहीं, पर्व के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस मुस्तैद है। पुलिस अधीक्षक सर्वानन टी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं।देवी पाटन मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन है। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण शताब्दियों पहले भर राजाओं ने कराया था। समय के साथ मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार हुआ, जिसके बाद इसका स्वरूप और भव्य हो गया। यह मंदिर अमेठी जिला मुख्यालय से करीब 13 किलोमीटर दूर रानी सुषमा महाविद्यालय के सामने स्थित है। मंदिर के सामने अमेठी रियासत का पुराना किला है। इसे राजपरिवार की कुलदेवी मां भवानी का स्थान माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में यह मंदिर पुराने किले के परिसर का हिस्सा हुआ करता था।
मां भवानी के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
मंदिर के पुजारी प्रीतम महाराज बताते हैं कि देवी पाटन मंदिर राजपरिवार की कुलदेवी मां भवानी का मंदिर है। इसका निर्माण भर राजाओं ने कराया था। यहां अमेठी सहित आसपास के जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मां भवानी की आराधना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह भी मान्यता प्रचलित है कि यहां देवी स्वयं प्रकट हुई थीं।
मंदिर परिसर में कई देवी-देवताओं के मंदिर
देवी पाटन मंदिर में प्रवेश करते ही मां भवानी के दर्शन होते हैं। मुख्य मंदिर के आसपास मां काली, शनिदेव, महादेव, सिद्धि विनायक, राधा-कृष्ण और संतोषी माता के मंदिर भी स्थित हैं। मंदिर परिसर के पिछले हिस्से में हनुमान जी का विशाल मंदिर और बारादरी बनी हुई है। नवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में भी श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं।
पीपल के पेड़ पर धागा बांधने और दीपक जलाने की मान्यता
देवी पाटन मंदिर परिसर में स्थित पीपल के पेड़ को लेकर श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। मान्यता है कि यहां पीपल के पेड़ पर धागा बांधने और दीपक जलाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसी आस्था के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां भवानी के दर्शन के साथ पीपल के पेड़ के पास भी पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बना हुआ है।