
पारदर्शी विकास न्यूज़ लखनऊ। बच्चों के भोजन और पोषण के अधिकार को लेकर भोपाल में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन रविवार को सम्पन्न हुआ। इसमें 18 राज्यों के 400 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। अधिवेशन में बच्चों के स्कूल प्रवेश समेत अन्य कार्यों में आधार की अनिवार्यता समाप्त करने, भोजन-पोषण योजनाओं के निजीकरण और व्यावसायीकरण पर रोक लगाने की मांग उठाई गई। घोषणा-पत्र में फेस रिकग्निशन, ई-केवाईसी और अनिवार्य ऐप जैसी व्यवस्थाओं को बंद करने तथा आंगनवाड़ी और स्कूलों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक सामग्री से गर्म पका भोजन उपलब्ध कराने की मांग की गई। साथ ही ‘आंगनवाड़ी ठीक करो’ अभियान चलाने, राज्यों में बच्चों के भोजन के अधिकार पर अधिवेशन आयोजित करने और राष्ट्रीय स्तर पर साझा कार्रवाई का निर्णय लिया गया। घोषणा में आईसीडीएस और पीएम पोषण का प्रभावी सामाजिक अंकेक्षण, आदिवासी व दूरदराज क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केंद्र बढ़ाने तथा उनकी सुविधाएं बेहतर करने की मांग की गई। स्कूलों के 200 मीटर दायरे में जंक फूड की बिक्री रोकने और किचन गार्डन विकसित करने पर भी जोर दिया गया। विस्थापित, प्रवासी, बेघर और सड़क पर रहने वाले बच्चों के लिए पहचान व पते की बाध्यता के बिना भोजन, पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा सुनिश्चित करने की मांग की गई। अधिवेशन में कुपोषण, भूख, मातृ एवं बाल पोषण, डिजिटलीकरण, सामाजिक सुरक्षा समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ज्ञान विज्ञान समिति की ओर से आशा मिश्रा, तेजराम भारती, नंदलाल, दिनेश नागर, सत्यम श्रीवास्तव और राकेश मालवीय शामिल रहे।