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बौद्ध तीर्थ यात्रा में कपिलवस्तु, लुंबिनी और श्रावस्ती का भ्रमण

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पारदर्शी विकास न्यूज़ अमेठी। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध धम्म तीर्थ यात्रा के आठवें और नौवें दिन यात्रियों ने कपिलवस्तु, नेपाल के लुंबिनी और श्रावस्ती के प्रमुख बौद्ध स्थलों का भ्रमण किया। इस दौरान यात्रियों ने भंते शीलवंश से त्रिसरण और पंचशील ग्रहण किया। भंते शीलवंश ने कपिलवस्तु के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि राजकुमार सिद्धार्थ ने अपने जीवन के शुरुआती 29 वर्ष इसी क्षेत्र में बिताए थे। यहीं से उन्होंने गृहत्याग किया था। लुंबिनी के बारे में बताया गया कि यह भगवान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली है। यहां सम्राट अशोक ने भी यात्रा की थी और बुद्ध के जन्मस्थान की स्मृति में स्तंभ स्थापित कराया था।ललित कुमार बौद्ध ने श्रावस्ती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवान बुद्ध ने अपने जीवन के लगभग 24 वर्षावास यहां बिताए। अनाथपिंडक ने जेतवन का बगीचा खरीदकर बुद्ध को दान किया था। श्रावस्ती में बुद्ध ने अनेक उपदेश दिए और अंगुलिमाल को संघ में शामिल किया।यात्रा का नेतृत्व बौद्धाचार्य शीतला प्रसाद बौद्ध और सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक राजेंद्र प्रसाद बौद्ध ने किया। यात्रा में पारसनाथ मौर्य, शंकर प्रसाद मौर्य, गया प्रसाद मौर्य, डॉ. बृजेश कुमार मौर्य, रामकुमार बौद्ध, रामसागर बौद्ध, विजय कुमार बौद्ध, रेखा, कलावती और हरिश्चंद्र कोरी सहित कई यात्री शामिल रहे।