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96 करोड़ के कन्वेंशन सेंटर का बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर को हैंडओवर, महापौर से विवाद बरकरार

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23 अक्टूबर से प्रस्तावित प्रदर्शनी के बीच तेज हुई कार्रवाई, टेंडर पर पहले ही उठा चुकी हैं आपत्ति

 

 

पारदर्शी विकास न्यूज़ कानपुर। शहर में करीब 96 करोड़ रुपये की लागत से बने कन्वेंशन सेंटर को लेकर चल रहे विवाद के बीच रविवार को इसे श्री बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर को हैंडओवर कर दिया गया। स्मार्ट सिटी के नोडल अधिकारी आरके तिवारी, टेक्निकल इंचार्ज राहुल सब्बरवाल और कंपनी के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्यों, तकनीकी व्यवस्थाओं और उपलब्ध सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके बाद हैंडओवर की प्रक्रिया पूरी की गई। हालांकि, सेंटर के संचालन और रखरखाव के टेंडर को लेकर महापौर प्रमिला पांडेय और नगर निगम प्रशासन के बीच विवाद अभी भी बरकरार है।कानपुर नगर निगम की जमीन पर कानपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने लगभग 96 करोड़ रुपये की लागत से कन्वेंशन सेंटर का निर्माण कराया है। इसका निर्माण वर्ष 2025 में पूरा हो गया था। 26 सितंबर 2026 को नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने श्री बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत कंपनी को सेंटर के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई।वहीं, 9 अक्टूबर को कार्यकारिणी की बैठक में महापौर प्रमिला पांडेय ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे निरस्त करने की बात कही थी। उनका तर्क था कि कन्वेंशन सेंटर के संचालन का निर्णय सदन से मंजूरी लेने के बाद किया जाना चाहिए। इस मुद्दे को लेकर नगर निगम प्रशासन और महापौर के बीच विवाद गहरा गया। महापौर ने लखनऊ में आयोजित छठवें राज्य वित्त आयोग के फोरम में भी यह मामला उठाया था।कन्वेंशन सेंटर में 23 से 27 अक्टूबर तक क्राफ्टरूट्स प्रदर्शनी आयोजित करने का प्रचार सोशल मीडिया पर किया जा रहा है। इसमें 22 से अधिक राज्यों के 100 से ज्यादा कारीगरों के शामिल होने की बात कही गई है। प्रदर्शनी में पारंपरिक वस्त्र, हथकरघा उत्पाद, होम डेकोरेशन, हस्तनिर्मित आभूषण सहित विभिन्न प्रकार के उत्पाद प्रदर्शित किए जाने प्रस्तावित हैं। इसके लिए सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक का समय निर्धारित किए जाने की जानकारी प्रचार सामग्री में दी गई है।हैंडओवर से पहले ही प्रदर्शनी के प्रचार-प्रसार को लेकर सवाल उठने के बाद प्रशासन ने प्रक्रिया तेज की। अब सेंटर का हैंडओवर होने के बावजूद टेंडर को लेकर महापौर की आपत्तियों और संचालन व्यवस्था पर विवाद के चलते यह मामला चर्चा में बना हुआ है।